"गांधी जी ऑक्सीजन और सूर्य की रोशनी के जैसा पूरे विश्व में फैला है इनका परिचय देना यानि सूर्य की रोशनी से तुलना करना"।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य पोरबंदर में हुआ था ।जबकी मृत्यु 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के "बिरला मंदिर प्रांगण" में नाथूराम गोड से हत्या कर दिया गया। 30 जनवरी 2022 को भारत सहित दुनिया के तमाम देश गांधी जी की 74 वी पुण्यतिथि मना रहा है और गांधीजी के आदर्शों और उनके सिद्धांतों को अपने अंदर समा रहे हैं गांधी जी "विश्व का"परिचय है।
गांधी जी का जीवन की शुरुआत और उनके संघर्षों की प्रारंभ उनके दोस्त अब्दुल्ला से होती है। अब्दुल दक्षिण अफ्रीका में व्यापार करता था और इन्हीं के सिलसिले में वह गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए थे और दक्षिण अफ्रीका के फिनिक्स में आश्रम स्थापित किए थे और पहली बार गांधीजी सत्याग्रह का प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में ही गोरे और काले के बीच किए और वहां पर उनकी जीत हुई यह गांधी जी का परिचय पूरे विश्व में होने लगी महात्मा गांधी को 1915 भारत में लौट आया।
महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया भारत में प्रथम जन आंदोलन 1917 में चंपारण सत्याग्रह आंदोलन था जिसमें भारतीय बटाईदार किसान और अंग्रेज बागान मालिकों के बीच में इकरारनामा को समाप्त किया गया था। किसान नील की खेती करते थे और इस प्रकार से गांधी जी द्वारा सफल आंदोलन यहां पर हुआ और तिनकठिया पद्धति को समाप्त किया गया इस प्रकार से महात्मा गांधी भारत में एक राष्ट्रीय चमक के रूप में उभर आए रवीद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को "महात्मा"की उपाधि दिया जबकि महात्मा गांधी ने रवीद्रनाथ टैगोर को "गुरुदेव" उपाधि दिया।
वह किसी भी हालत में सत्य और अहिंसा के सिद्धांत को तोड़ना नहीं चाहते थे ।महात्मा गांधी अपने जीवन में प्रत्येक सोमवार को मौन व्रत रखा करते थे और कोई भी बात लिख कर देते थे गांधीजी अपने जीवन का अगला आंदोलन 1920 में असहयोग आंदोलन को चलाया इसके आगे बात करें तो 1930 का दांडी मार्च प्रारंभ हुआ जिसमें नमक तोड़ो कानून आंदोलन भी कहा गया उसी प्रकार से आगे गांधी का प्रभाव देखते हुए सरकार ने लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया ताकि भारत के भविष्य को तय किया जाए लेकिन गाधी जी आजादी और स्वराज से कुछ भी नहीं कि समझौता पर डटे थे।
गांधी जी द्वारा चला गया भारत के लिए अंतिम आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन था इसमें गांधी अपने जीवन में आजादी को प्राप्त करेंगे यही सजा दी को प्राप्त करने में मैं अपने प्राण की आहुति भी दे दूंगा इसे गांधी जी ने "करो या मरो" का नारा इसी आंदोलन में दिया।और 5 सालो के बाद यानी 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया।
हमे गांधी जी के मूल्यों और सिद्धांतों पर चले।भारत की आन ,बान और शान पहचान के साथ पूरे विश्व को सत्य और अंहिसा की रास्ता दिखाने वाले को किसी भी प्रकार की विवाद से बचना चाहिए हमें गांधी जी को समझने की और आवश्यकता है।ताकि भारत साहित पूरे विश्व के यूवा पीढी महात्मा गांधी को और उनके कर्तव्यों को समझ सके।
जय हिदं
बहुत अच्छा सर लगे रहिए
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