भारत का क्रिप्टो करेंसी "सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी"

 "मुद्रा ही सभी गतिविधियों का विनमय और नियंत्रण का साधन है, मुद्रा के बिना कोई भी कार्य या बात करना व्यर्थ है"



भारत सरकार 2022-2023 में पहली क्रिप्टो करेंसी जारी करने की घोषणा की है। मुद्रा भारतीय सेंट्रल बैंक करेंसी होगी । वित्तीय वर्ष 2022-23 में आरबीआई दूसरे प्रकार की मुद्रा का प्रयोग करेगा। और इस मुद्रा पर आरबीआई 30% कर लगाने की घोषणा भी की है। यह मुद्रा डिजिटल होगी जो भारतीय रुपए के सामान्य होगा यानी भारतीय सिक्के और नोट की तरह होगी लेकिन यहां "डिजिटल" में होगी भारतीय सेंट्रल बैंक करेंसी "ब्लॉकचैन के साथ दूसरी तकनीकों का उपयोग" करके सुरक्षित और लीगल टेंडर मुद्रा होगी। डिजिटल मुद्रा जारी हो जाने से भारत की "वैश्विक अर्थव्यवस्था" मजबूत होगी और भारत विश्व के साथ अपनी अर्थव्यवस्था का तालमेल बैठा पाएगा और प्रतिस्पर्धा भी कर पाएगा। वर्तमान समय में "ब्रोकर चूसर व अन्य रिपोर्ट"के आधार पर भारत दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो करेंसी का मालिक है दूसरे स्थान पर अमेरिका है 2022 में भारत की कुल जनसंख्या का 7.30 प्रतिशत की जनसंख्या डिजिटल मुद्रा का उपयोग कर रही है जो कुल जनसंख्या का विश्व में "पांचवा" स्थान है।


क्रिप्टो करेंसी करेंसी का संस्थापक गुमनाम व्यक्ति सतोशी नाकामोटी  द्वारा किया गया था इनके द्वारा बनाए गए पहली "मुद्रा बिटकॉइन" थी जो दुनिया की पहली डिजिटल करेंसी था। यह मुद्रा 2009 में पेश किया गया इसके अलावा बाजार में अन्य प्रकार के भी क्रिप्टो करेंसी मौजूद है। सातोशी ने डिजिटल करेंसी को "ब्लॉकचैन तकनीक" पर आधारित स्थापित किया था जो एक प्रकार से लीगल मुद्रा नहीं था लेकिन वर्तमान समय में इनकी महत्व अधिक हो गई है।

ब्लॉकचेन को "डिस्ट्रीब्यूटर ब्लेजर" यानी बहीखाता भी कहा जाता है इसमें "डिजिटल ट्रांजैक्शन" की रिकॉर्ड को बेहद सुरक्षित रखा जाता है इनकी लेनदेन को हटाया या बदला नहीं जाता है इसी समूह को ब्लंक भी कहा जाता है क्रिप्टो की लेनदेन में अत्याधुनिक कोडिंग तकनीक की जरूरत होती है ब्लॉकचेन में एक कॉलम भर जाने के बाद दूसरे कॉलम में दर्ज किया जाता है कोई उपभोक्ता पैसे भेजता है तो वहां सैकड़ों- हजारों कंप्यूटर द्वारा सत्यापित किया जाता है यानी कि ब्लॉक  में एक कॉलम भर जाने से दूसरा कॉलम तैयार हो जाता हैं और भुगतान करते समय हजारों कंप्यूटर क्रियाशील होती है।


क्रिप्टो करेंसी में वित्तीय लेनदेन के लिए दो प्रकार के खाता होते हैं जिसमें एक सार्वजनिक खाता इस खाता में किसी भी व्यक्ति द्वारा वित्तीय लेनदेन का विवरण उल्लेख होता है तथा दूसरा निजी व्यक्ति द्वारा लेन-देन करने के लिए निजी खाता होती है इसी खाता में व्यक्तिगत वित्तीय विवरण होती है ।दोनों खाता वॉलेट के अंदर होती है और क्रिप्टोकरंसी तक पहुंच के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है इस प्रकार से क्रिप्टो करेंसी सुरक्षित प्लेटफार्म तैयार करती है और वित्तीय लेनदेन की धोखाधड़ी से बजा बचाता है


क्रिप्टो करेंसी का लेनदेन ब्लांक में किया जाता है यहां बहुत अधिक जटिल प्रक्रिया है। हैकर के लिए डिजिटल लेजर से छेड़छाड़ या हेरफेर करना मुश्किल होती है। क्रिप्टो करेंसी की भुगतान के लिए दो प्रकार के कारकों को प्रमाणित किया जाता है उपयोगकर्ता को अपना पासवर्ड और यूजर आईडी दर्ज करना पड़ता है तथा दूसरी बार अपने मोबाइल पर भेजा संदेश के माध्यम से भेजा गया अंतिम प्रमाणित होती है इसके बाद क्रिप्टोकरसी का भुगतान संभव हो जाता है। एक प्रकार से देखें तो क्रिप्टो करेंसी डिजिटल मुद्रा पर आधारित करेंसी है जो अधिक सुरक्षित और बेहद सुगम बनाती है।


क्रिप्टो करेंसी का नियामक कोई सरकारी संस्था नहीं होती है लेकिन भारत में आरबीआई डीजल करेंसी का नियामक होगा जो बहुत ही सुरक्षित और लीगल होगी ।आरबीआई द्वारा नियंत्रित क्रिप्टोकरंसी भारतीय व्यापारियों एवं युवाओं के लिए तथा विश्व निवेश कर्ताओं के लिए एक अच्छा प्लेटफार्म तैयार करेगा इस प्लेटफार्म के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। क्रिप्टो करेंसी वैल्यू डिमांड पर निर्भर करता है  अर्थव्यवस्था में कुल कितनी मांग और आपूर्ति है इस हिसाब से क्रिप्टो करेंसी की मांग बढ़ती और घटती है जबकि बिटकॉइन  ब्लॉकचेन पर काम करती है बिटकॉइन की सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफी तकनीक का उपयोग किया जाता है।



क्रिप्टो करेंसी का भंडारण आमतौर पर क्रिप्टो वॉलेट में किया जाता है। भंडारण को फिजिकल या ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से भंडारित किया जाता है।भंडारण को प्राइवेट कुंजी से सुरक्षित किया जाता है।वालले खासतौर पर दो प्रकार के वॉलेट होती हैं जिसमें "हॉट वालेट" और "कोल्ड वालेट" जैसे शब्दों का भी उपयोग किया जाता है। हॉट वाले में अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है जबकि कोल्ड वॉलेट में सुरक्षित भंडारण के लिए "ऑफलाइन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण" का उपयोग किया जाता है।



सभी देशों में एक जैसी क्रिप्टो करेंसी नहीं है वर्तमान में जिस प्रकार से मुद्रा सभी देशों की अलग-अलग मुद्रा है उसी प्रकार से सभी देश अपने तरह की क्रिप्टो करसी लागू कर रही है। क्रिप्टो करेंसी का सरकारी नियामक नहीं होने के चलते इनके उपयोग करने से संकोच करता है कोई उपभोक्ता अपने पासवर्ड और यूजर आईडी भूल गया तो इनकी संपत्ति खतरे में हो जाएगी। भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षाता एवं अधिक मात्रा में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने से क्रिप्टो करेंसी का उपयोग करना कम संभव है।


  वर्तमान में भारतीय बाजार में फिजिकल मुद्रा अधिक संचालित है लेकिन क्रिप्टो करेंसी आ जाने से धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ेगी। क्रिप्टो करेंसी "डिजिटल इकोनामी" को बढ़ावा देगा। भारतीय युवा पीढ़ी को आकर्षित करेगा। भारतीय बाजार, वैश्विक व्यवस्था के प्रतिस्पर्धा में खड़ी होगी। भारतीय मुद्रा विदेशी मुद्रा की प्रवाह अपने देशों में डिजिटल के माध्यम से होगा और कोई भी निवेश करता भारत में आसानी से निवेश कर सकेगा । कुल मिलाकर देखें तो क्रिप्टो करेंसी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगी इसके साथ ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के साथ एक नई डिजिटल मुद्रा में प्रवेश होगी

भारत ने पहले नवंबर के हफ्ते 2022 में डिजिटल करेंसी जारी कर दी गई है पहले स्तर पर डिजिटल मुद्रा बैंकिंग लेनदेन के तहत की जाएगी तथा बाद में रिटेल के रूप में आम लोगों के लिए जारी कर दिया जाएगा।

धन्यवाद


KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

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