"युद्ध में जीत हो या हार हो नुकसान ही होती है"।
रूस की संगठन यूएसएसआर तब कमजोर हो गई थीं जब सोवियत संघ का विघटन हो गया। सोवियत संघ में कुल 15देश शामिल था जो विघटित होकर अलग-अलग देश बन गए। शीत युद्ध 1945 से 1991 तक चलती है यह युद्ध अमेरिका-रूस के ध्रुवीय शक्ति के रूप में हुए क्योंकि विश्व का सबसे महाशक्ति इंग्लैंड का विघटन हो चुका था।दुनिया पर राज करने के लिए अमेरिका और रूस ही आमने-सामने था। यूक्रेन की राजधानी कीव है जबकि रूस की राजधानी मास्को है ।2014 में रूस ने यूक्रेन पर हमला करके एक भाग जीत लिया और उसे क्रीमिया का नाम दिया यूक्रेन ,रूस की दक्षिणी सीमा वर्ती देशों की सीमावर्ती बनाती है। वर्तमान समय में पुरुष दुनिया की सबसे बड़ी क्षेत्रफल वाला देश है पुरुष की यूक्रेन पर इस प्रकार की प्रतिक्रिया कहीं न कहीं साम्राज्यवादी नीति के साथ विश्व में सर्वोच्च को दर्शाती है।
रूस,यूक्रेन की सीमा पर युद्ध हथियार के साथ सैनिकों की बड़ी संख्या में तैनात कर रखा है वह कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अमेरिका लगातार रूस पर राजनीतिक दबाव बना रखा है यदि रूस किसी प्रकार से आक्रमक नीति अपनाता है तो उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में कई देशों के साथ उनकी समझौता और व्यापार रद्द हो सकती है।विश्व के सभी देशों की निगाहें रूस अमेरिका पर टिकी हुई है एक बार फिर दोनों देश आपने धुर्वीय शक्ति को दिखाने के लिए यूक्रेन में आकर भीड़ सकते हैं क्योंकि दुनिया में हमेशा रूस और अमेरिका के बीच आपने सवोत्तम को लेकर ऐसे नीति अपनाते रहते हैं जिसके चलते अन्य देशों की अर्थव्यवस्था ठंड पड़ जाती है जिस प्रकार से अमेरिका और रूस के बीच द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शीत युद्ध का माहौल चला युद्ध के माहौल में कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
यूक्रेन-रूस के विवाद पर NATO सैनिक संगठन यूक्रेन में सक्रिय दिख रही है NATO मे कुल 12 देशों को मिलाकर 1949 में एक सैनिक संगठन बनाया गया था ।जिसका उद्देश्य सुरक्षा को लेकर था किसी सदस्य देश पर हमला होती है तो पूरे देश मिलकर इन को बचाएंगे वर्तमान में नाटो संगठन में कुल 30 देश शामिल है जो सभी देश सुरक्षा को लेकर हमेशा मुस्तैद रहते हैं नाटो संगठन दुनिया की सबसे बड़ी शक्तिशाली और मजबूत सैनी संगठन है इस संगठन का नियंत्रण अमेरिका के पास है जबकि रूस के पास SEATO संगठन है जो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सैनिक संगठन माने जाती है। रुस अपने सैनिकों पर कुल खर्च 2020 में 61. 7 अरब डॉलर खर्च किया है जो दुनिया के 5 देशों में शामिल है ।SEATO संगठन का नियंत्रण रूस के पास है जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्वी एशिया में शांति व्यवस्था के लिए सैनिक सहायता करना।
व्यापार के मामले में रूस-यूक्रेन बेहद करीबी है। यूरोप के देशों के सभी ऊर्जा रुस द्वारा आपूर्ति किया जाता है जिसमें सबसे बड़ी ऊर्जा गैस के रूप मे रूस पश्चिमी देशों को आपूर्ति करता है ।यूक्रेन-रूस द्विपक्षीय व्यापार बात करें तो 2011 में 50 बिलियन डॉलर था जबकि 2019 में घटकर 11 billion-dollar हो गया है घटता व्यापार कहीं न कहीं दोनों देशों के बीच टकराव को दिखाता है और निर्भरता ना रहकर स्वतंत्र रहना चाहता है ।एक्सपर्ट का मानना है यूक्रेन आपने वस्तुओं का अधिक निर्यात रूस के बाजारों में करता है और उसे बड़ी मात्रा पर आय की प्राप्ति भी करता है।
रूस यूक्रेन विवाद 2014 से:-
2014 में रूस ने यूक्रेन के एक भाग पर हमला करके अपने रूस में शामिल कर लिया और उसे क्रीमिया का नाम दिया। यूक्रेन आपने रक्षा के लिए नाटो से हाथ मिलाने की योजना बना लिया। रूस ने यूक्रेन को कहां अपने देश में नाटो का प्रवेश ना दें क्योंकि नाटो के प्रवेश से रूस की भौगोलिक सीमा पर सुरक्षा को लेकर आशंका जताया गया। रूसी एक झटके में दो विवादों को सुलझाना चाहता है ।पश्चिमी देशों की समझौता और नाटो शक्ति की कमजोर करना यह रूस की दोहरी नीति में शामिल है। दिसंबर 2021 में नाटो प्रमुख नार्वे के प्रधानमंत्री जेम्स स्टोलटेनबरग से यूक्रेन के राष्ट्रपति की मुलाकात से विवाद ताजा हो गया यूक्रेन में सुरक्षा के लिए नाटो सेना की तैनाती सक्रिय देखी गई एक लाख से अधिक सैनिक के साथ जहाज हथियार ,गोला ,बारूद तैनात कर दिया गया है
यूक्रेन रूस विवाद पर भारत की प्रतिक्रिया:-
कीव भारतीय दूतावास ने कहा है यूक्रेन में कभी भी तनाव का माहौल उत्पन्न के साथ युद्ध की संभावना हो सकती है। भारतीय दूतावास में भारतीयों को गैर -यात्राएं और जरूरी यात्राएं पर बचने को कहा है। यूक्रेन में भारतीय 2020 में लगभग 20000 छात्राएं अध्ययन कर रहे थे को कोविड मे कुछ संख्या कम हो सकती है।भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि सभी भारतीय अपने देश की ओर लौट आए।भारत रूस के साथ ऐतिहासिक और दोस्ताना रिश्ते हैं तथा बड़ी व्यापारिक का साझेदार के साथ सैनिक हथियारों का भी भागीदार है। यूक्रेन भी भारत के साथ अच्छी व्यापार समझौता है दूसरी और अमेरिका से भारत के बीच दूसरी सबसे बड़ी व्यापारिक समझौता है। भारत, यूक्रेन-रूस के विवाद पर असमंजस में है भारत की प्रतिक्रिया यही होगी आपने हित को देखकर यथास्थिति और गुटनिरपेक्षता नीति का पालन करना चाहिए
यदि यूक्रेन रूस विवाद युद्ध हो जाती है तो कह देशों के साथ व्यापार व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है यूक्रेन में नाटो सेना सक्रिय हैं नोटों पर हमला यानी अमेरिका पर हमला और अमेरिका इसे कभी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा ।दो शक्तिशाली देश रूस अमेरिका आपस में भिड़ी जाएंगे और एक बड़ी युद्ध में तब्दील हो जाएगा ब्रिटिश प्रधानमंत्री का वक्तव्य यहां पर सटीक बैठता है यदि जंग जुबानी हो तो अच्छी है हथियार गोला बारूद से हम करते हैं तो काफी नुकसान हो जाती है हथियार गोला से मानव जीवन का भी विनाश है यथा संभव हो जुबानी जंग से ही यूक्रेन रूस विवाद समाप्त कर दिया जाए अंत दोनों देशों के बीच यूक्रेन-रूस ने विवादों को सुलझाने के लिए उच्च स्तरीय कमान गठित करनी चाहिए और युद्ध से बचकर एक अच्छे सुमार्ग की ओर जाएं जिसमें यूक्रेन और रूस तथा विश्व के मानव समुदाय के साथ मानवता भी बना रहे।
धन्यवाद
Nice sir jee
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