"सामान्यीकरण को इतिहासकार मार्क ब्लॉक "व्यापार की रीति" कहते हैं"।
इतिहास में एक प्रकार से सामान्यीकरण को तथ्यों के बीच संबंध या संपर्क को दर्शाने तथा उदाहरण प्रस्तुत करने वाला संबंध का प्रयोग करता है। इतिहासकार सामान्यीकरण से आपने सामग्री को समझते हैं और तथ्यों को दूसरों तक पहुंचाते हैं। समानीकरण से घटनाओं का विश्लेषण और व्याख्या आदि में प्रयोग करते है इसके अलावा तथ्यों ,आंकड़ों, समानताएं ,विषमताओं के आधार पर भी निष्कर्ष निकाला जाता है, कोई विशेष क्षेत्र में नेता ,जननेता ,जाति ,धर्म की बात करते हैं तब पर भी हम सामान्यीकरण का इस्तेमाल करते हैं।
सामान्यीकरण के स्तर इस प्रकार से है-
निम्न स्तरीय-यह तब होती है जब किसी तथ्य या घटना को किसी खाचे मैं डालते हैं इसका वर्गीकरण ,कालबद्ध करते हैं। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की जाति ,धर्म ,क्षेत्र या अमुक घटना किसी विशेष क्षेत्र में वर्ष दशक या शताब्दी में हुई घटी घटनाओं का अध्ययन निम्न सामान्यीकरण स्तरीय पर किया जाता है।
मध्यम स्तरीय-इतिहासकार इसका प्रयोग करते हैं जब किसी घटना के होने की अंतर्संबंध को जोड़ते हैं जैसे पंजाब में किसान आंदोलन 1929-37 में हुए आंदोलन तब इतिहासकार इस घटना की व्यापक जांच करते हैं और पीछे के संबंधों और कड़ियों को देखते हैं और अपने विषय वस्तु तक ही इसे सीमित रखते हैं। मध्य सामान्यीकरण से उपनिवेशवाद ,पूंजीवाद ,राष्ट्रवाद सामंतवाद जैसे विषयों को नहीं परखा जा सकता है जैसे 1920 के दशक में जमशेदपुर में मजदूरों का आंदोलन। 1930 के दशक में भारत में औद्योगिक पूंजीवाद का विकास। 1930 के दशक में भारत में श्रमिक कानूनों के बनाने से संबंधित विषय।
व्यापक का सामान्यीकरण -इतिहासकार इसका प्रयोग व्यापक रूप से समाज को बंधनी के साथ आर्थिक राजनीतिक सामाजिक सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिकी ए का अध्ययन करते हैं जैसे एशिया और अफ्रीका यूरोप के धार्मिक सामाजिक व्यवस्था को कोई इतिहासकार समझना चाहता है तो व्यापक समझ से प्रेरित होता है व्यापक सामान्य करण का प्रयोग करने वाले इतिहासकार कार्ल मार्क्स मैक्स वेबर रोमिला थापर डीडी कोसांबी आर एस शर्मा इरफान हबीब इत्यादि है।
सामान्यीकरण की आपत्तियां:-
सामान्यीकरण स्पष्ट होनी चाहिए ताकि बहस खुली रूप से हो सके इनके आकार और प्रकार भी पारदर्शी होनी चाहिए इनकी सत्यता या वैधता करार के लिए प्रमाण की आवश्यकता होनी चाहिए। इतिहासकार अच्छा इतिहासकार है जब वह निष्ठाभाव और तकनीकी कौशल के साथ सामान्यीकरण का तालमेल सही रूप से बैठता है।
सामान्य करण के स्रोत:-
किसी विषय पर लिखा हुआ पिछला विवरण एक प्रकार से स्रोत उपलब्ध कराती है ,इसके अलावा व्यक्तियों के व्यवहार जन व्यवहार, भीड़, आर्थिक सिद्धांत, राजनीतिक व्यवस्था, भाषा वज्ञान ,परिवार की भूमिका भी स्रोत है ।इतिहास ,समाज संस्कृति और राजनीतिक से संबंधित मार्क्स बेवर एवं फ्रॉड सिद्धांत सामान्य करण का अन्य प्रमुख स्रोत माना जाता है इसके अलावा समाजों में दमीतो, दलितों ,जाति विरोधी समूहों ,आदिवासियों के आंदोलन ,जन असंतोष और विपक्षी आंदोलन सामान्यीकरण का स्रोत ही है। वैज्ञानिक अध्ययनों की जानकारी या विश्लेषण का परीक्षण का उपयोग सामान्यीकरण में ही होती है।
सामान्यीकरण की सुधार:-
विचारो को सही रूप से निभाना, सीखना वर्णन करना छोटे-छोटे चित्रण का प्रयोग करना आर्थिक सिद्धांतों का प्रयोग करना और तार्किक भ्रांतियों से बचना चाहिए। इतिहासकार को सोचने और लिखने में स्पष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए और भाषा सरल व सहज हो ताकि जनमानस सरल रूप में समझ सके। इतिहासकार जिस बातों को रखते हैं उनका अध्ययन और पर्यवेक्षण करना चाहिए नए बातों को शामिल करने के लिए गहन विश्लेषण होनी चाहिए जैसे नए पोशाक जैसे कपड़ों को रुप में नहीं अपना लेनी चाहिए। नवीन तथ्यों को प्रस्तुत करने से पहले प्राचीन तथ्यों का विश्लेषण करना चाहिए हमें वर्तमान में बेहतर जानकारियां प्राप्त करके अच्छी तरह से खोज खबर लेते रहना चाहिए और वर्तमान समय में बने रहना चाहिए।
किसी व्यक्ति के जीवन के साथ सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक जीवन का विशेषण है। सामान्यीकरण इतिहास का महत्वपूर्ण अंग है इसमें कई आपत्तियां है लेकिन सामान्यीकरण इतिहास का महत्वपूर्ण भाग है। प्राचीन रचनाओं के साथ ताल में बैठाकर वर्तमान में हमें बनाए रखता है। इतिहासकार सामान्य एवं जटिल सामग्रियों का ग्रहण करके तथ्यों और स्रोतो सामग्री को समझने के आधार तैयार करते हैं। वर्तमान समय में सामान्यीकरण एक व्यापक हथियार के रूप में इतिहासकार के क्षेत्रों में प्रयोग होता है।
धन्यवाद