श्रीलंका में आर्थिक के स्रोत क्या है :-
श्रीलंका की मुख्य आर्थिक स्रोत वहां की पर्यटन से है श्रीलंका में बड़ी मात्रा में विदेशी लोग इस प्रदेश की भ्रमण करते हैं जिसमें उसे विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है लेकिन अचानक 2019 में विभिन्न स्थानों पर हुए बम धमाकों में कई गिरजाघर के लोग मारे गए जिसमें से 235 से ऊपर लोग मारे गए जिसके चलते विदेशी यात्री श्रीलंका में आने से घबराने लगे जिसके चलते श्रीलंका की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी होने लगी और आगे चलकर विश्व महामारी कोरोनावायरस की चपेट में आने से उसकी विदेशी यात्रा प्रतिबंधित हो गई और लॉकडाउन की मार से वह कमजोर होता चला गया।
चाय उत्पादन का स्रोत:-
श्रीलंका एक अच्छी मात्रा में चाय उत्पादक देश है क्योंकि यहां पर अच्छी गुणवत्ता वाले चाय का उत्पादन अच्छी खासी मात्रा में की जाती है लेकिन लॉकडाउन के चलते पूरे विश्व व्यापार आयात-निर्यात पर प्रतिबंध होने के चलते इनकी चाय उत्पादन भी कमी देखने को मिली और यह अपने आप में अच्छे वित्तीय स्रोत उपलब्ध नहीं करा पाए जिसके चलते चाय की मांग और आपूर्ति दोनों ठप हो गई जिसके चलते कई चाय की बगाने या तो नष्ट हो गए या तो नीलाम कर दी गए या तो औने-पौने दाम में बेच दिया गया श्रीलंका में चाय बागान भी उजाड़ की स्थिति में आ गई तो निश्चित है कि जब खाने-पीने की वस्तुएं समाप्त होगी तो जनता सरकार के दरबार की और आएगी तो ऐसा ही श्रीलंका मे हुआ।
गोटाबाया की सरकार:-
यह सरकार अपने चुनावी वादों में कई वादे करती है और इसे काम करने के लिए इसके पास वित्तीय अभाव देखा गया जिसमें से सही रूप से प्रबंधन ना होने के चलते और खाने-पीने की महंगाई बढ़ गई। जनता में सरकार के प्रति गुस्सा भड़क गया।
कृषि करने के लिए खाद उर्वरक:-
जब श्रीलंका में कृषि कार्य करने से उर्वरक , कीटनाशक नहीं बचा तो सरकार पूरे श्रीलंका में खाद आयात को प्रतिबंधित कर दिया और रातों-रात श्रीलंका को 100% जैविक खेती करने के लिए घोषित कर दिया गया ।जैविक खेती वह है जिसमें किसी प्रकार की उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन आज की दुनिया में कोई भी ऐसा किसान खेत इस प्रकार से ढल चुकी है कि बिना उर्वरक की खेती नहीं हो सकती है। जैविक खेती के चलते फसल उत्पादन काफी कम रहा जिसमें खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई और वहां किसानों की आय पर भी बुरा प्रभाव पड़ा इसके साथ ही साथ वहां की बाजार प्रणाली भी प्रभावित हो गई। जैविक कृषि में उत्पादकता कम होती है और काफी लोगों की भुख को मिटाया नहीं जा सकता है क्योंकि आज हमारे पास जो भी जमीन है वह जमीन उर्वरक पर निर्भर है बिना उर्वरक डालें हम कृषि नहीं कर पाएंगे क्योंकि में नाइट्रोजन ,पोटेशियम ,कैल्शियम की मौजूदगी के चलते पौधों को पोषण मिलता है और अच्छी खासी वृद्धि होती है जो सरकार की यह नियम अचानक लगा देना सही नहीं रहा जिसमें खाने-पीने की दाम अचानक बढ़ गई।।
अंतर्रष्ट्रीय मुद्रा कोष:-
श्रीलंका अपने देश में वित्तीय स्थिति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से भारी मात्रा में कर्ज लिया और यह संस्थान द्वारा काफी उच्च दरों पर इसे कर्ज दिया गया कर्ज की भर सहन करना श्रीलंका के लिए बस की बात में नहीं था जिसके चलते गोटाबाया की सरकार ने अपने देश में कर उच्च मात्रा में लोगों पर लगा दिया जिसे भारी मात्रा में लोग कर के भुगतान न करने और सरकार का विरोध करने लगा।
चीन और अन्य देशों के साथ कर्ज:-
श्रीलंका के साथ चीन काफी बड़ी मात्र में वित्तीय सहायता प्रदान किया है भारत अन्य देश भी श्रीलंका को भी वित्तीय सहायता प्रदान किया है कुल मिलाकर देखें तो फिर श्रीलंका पर काफी बड़ी मात्रा में विदेशी कर्जा है और इस कर्ज को न चुकाना पाने के चलते श्रीलंका अपने देश में आपातकाल की घोषणा कर दिया आपातकाल में वित्तीय संकट उत्पन्न हो गई है और सरकार इसे पूरा करने में असफल हो जाती है और आपने मनमाने तरीके से जनता पर कर ठोक देती है इन मनमानी कर के चलते श्रीलंकाई लोग सड़क पर उतर आए भारी विरोध प्रदर्शन और गृह युद्ध जैसी घटनाएं हुई।
भारत की ओर से श्रीलंका को मदद:-
भारत सरकार श्रीलंका की वित्तीय आपात और स्थिति सुधारने के लिए काफी बड़ी मात्रा में सहायता प्रदान किया है भारत सरकार काफी बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल का निर्यात किया है ताकि वहां के लोग कम मात्रा में खदान की आपूर्ति हो सके इसके अलावा भारत सरकार आर्थिक सहायता के रूप में बिलियन ओं में सहायता प्रदान किया है और भारतीय एसबीआई बैंक भी श्रीलंका की सरकार को बड़ी मात्रा में कर्ज दिया है ताकि वह अपने देश में वित्तीय स्थिति को सुधार सके। श्रीलंका, भारत का पड़ोसी देश है और दक्षिणी भाग में तटीय के रूप और समुद्री सीमा के रूप में यह सीमा बनाती है और भारत को सुरक्षा प्रदान भी करती है। श्रीलंका चीन की सरकार काफी निवेश कर रखा है वहां की कई बंदरगाहों को अपने अधीन लिख कर रखा है और अपने तरीके से उससे चला रहा है। चीन की "घेरे के नीति" के अंतर्गत है वह चाहता है कि भारत के पड़ोसी देशों को घेरे के रखें क्योंकि दक्षिण एशिया में चीन ही भारत को टक्कर दे सकता है और भारत चीन को टक्कर दे सकता है इसके अलावा और कोई देश ऐसा नहीं है। इसी वजह से भारत सरकार श्रीलंका को काफी सहायता प्रदान किया है।
श्रीलंका में आर्थिक आपातकाल और वित्तीय संकट उत्पन्न होने के कई कारण है वहां की सरकार की प्रबंधन खाद्य आपूर्ति ठप होना, लॉकडाउन की मार इसके अलावा विदेशी कर्ज अधिक मात्रा, श्रीलंका को जैविक कृषि राष्ट्र बनाना तमाम कारणों के चलते श्रीलंका की स्थिति काफी बुरा हुआ इन वजन का चलते वहां पर खाने-पीने ईंधन की कीमतें बढ़ गई और विदेशी यात्री न आने के चलते इसकी "विदेशी मुद्रा भंडार" में काफी कमी हो गई जिसके चलते श्रीलंका में "भुगतान संतुलन" की स्थिति बिगड़ गई।
जय हिंद 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
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