जीवन संघर्ष ,जीवन में परिवर्तन, एक व्यवसाय और मोटिवेशनल फिल्म "लाल सिंह चड्ढा", रिलीज 11August 2022




 जीवन का अर्थ ही है "नया चीज को सीखना" और उसे अपने जीवन में उतारना।ऐसे ही फिल्म भारतीय बॉलीवुड की देन रही है लाल सिंह चड्ढा में भारतीय संस्कृति, धार्मिक, सांस्कृतिक जीवन संघर्ष , सैनिक का जीवन, कारगिल युद्ध भारत पाकिस्तान 1971 युद्ध, अटल बिहारी वाजपेई की रथयात्रा, बाबरी मस्जिद पर ढांचा गिराना, धार्मिक नफरत फैलाना, समाज में धर्म का जहर फैलाकर लोगों को गुमराह करना और खून खराबा करना, चड्डी बनियान कंपनी RUPA की उन्नति तथा अन्य नए-नए तरीके फिल्में दिखाया गया है।

लाल सिंह चड्ढा का परिवार:-

इनका परिवार सैनिक परिवार था जिसमें प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध और भारत की रक्षा के लिए न्छायोवर हो जाता है उसी प्रकार से लाल सिंह चड्ढा भी अपने पुरखों की जैसा उनके माता-पिता सैनिक ही बनाना चाहते हैं उसे कन्वेंट स्कूल में नामांकन ना मिलता है जिसमें उसकी मम्मी स्कूल में खाना-पीना ,झाड़ू पोछा सब लगाने को तैयार रहती है "फ्री ऑफ कॉस्ट"में तब उन्हें कहीं जाकर नामांकन मिलता है और उसे मम्मी कहती है अपने बच्चे से जितना हो सके बेटा उतना से अधिक थोड़ा करना इसकी इंस्पिरेशन लाल सिंह चड्ढा के लिए बहुत बड़ा मार्ग दिखाता है क्योंकि थोड़ा वह चंचल दिमाग और पारदर्शी दिमाग का रहता है लेकिन उसे चीजों को समझना बुझना बस की बात में था लेकिन वह कुछ बीमारी का कारण केवल वह समझ नहीं पाता है पढ़ने लिखने की‌ क्षमता था उसे सच्चे मन, दिल और लगन के साथ करता था वह आपने हर काम में अव्वल होने लगा था।

लाल सिंह चड्डा की मां:-

 उनके जीवन में सबसे बड़ा प्रेरणादायक मां बनी रहे क्योंकि उनकी मां का जीवन भी एक संघर्ष से बीता इनके पति शहीद हो जाने के बाद परिवार अकेला हो गया था लेकिन वह हार नहीं मानी। वह अपने कृषि कार्य करने के लिए खुद से उठ ट्रैक्टर चलाकर बृहद पैमाने पर कृषि कार्य करते और आपने जीवन ,परिवार और संबंधियों को चलाते थे। एक औरत की सशक्तिकरण और दृढ़ संकल्प को भी दिखाया गया है ताकि लोग किसी भी परिस्थिति में ना टूटे और उसकी मम्मी हमेशा कहती है अपने बेटे को ही बेटा तकलीफों को पीछे छोड़ दो और आगे बढ़ो। हर एक कदम पर उनकी मां सहयोग किया चाहे वह विद्यालय छोड़ने विद्यालय से वापस लाने का हो अच्छी चीजें सिखाना हो यह सारा चीज मां उनको एक बिजली बल्ब के जैसा रोशनी दिया। इस फिल्म में लाल सिंह चड्ढा हमेशा अपने मां के बारे में कहते हैं कि  धार्मिक युद्ध विवाद अधिक फैल जाता था तो उसे सिखाता था कि बेटा शहर में बहुत मलेरिया हो गया बाहर नहीं जाना तमाम चीजें दिखाया गया है।

धार्मिक पक्ष:-

 इस फिल्म में सिख दंगे ,अमृतसर पर हमला, दिल्ली सिखों की दंगा और अल्पसंख्यक लोगों में सिखों को दिखाया गया है जिसमें कई तकलीफों की समस्या का उठाना पड़ा क्योंकि पंजाब के पश्चिमी भाग और कुछ पाकिस्तान से भाग मिलाकर एक नई देश खालीस्थान की मांग में भिंडरावाला के नेतृत्व में युद्ध संघर्ष होती है इंदिरा गांधी की सरकार ने इसे खत्म कर देती है इस फिल्में आपातकालीन 1975 से 77 के बीच की अवधि को भी दिखाया गया है उसमें किस प्रकार लोगों की समस्या होती थी इन तमाम चीजों को दिखाया गया है।

लाल सिंह चड्ढा का जीवन साथी :-

स्कूल के समय ही जब वह पहली प्रवेश करता है कक्षा में विद्यार्थी लोग बैठने नहीं देता है तब एक रूपा नाम की लड़की उसे बैठने को कहती है फिर उनकी दोस्ती रूपा से हो जाती है उसके साथ बैठना ,पढ़ना ,लिखना ,बातें करना लेकिन वह हर समय उनके साथ शारारती दिखाता यदि रूपा क्लास देखती तो लाल सिंह चड्ढा रूपा को देखता। हर काम उल्टा होता था इसे फिर वह लेकिन उनका जीवनसाथी मॉडलिंग बनना चाहती थी लेकिन का सपना अधूरा रह जाता है हमेश भारतीय बॉलीवुड डायरेक्टर और अन्य लोगों के साथ आज सामाजिक कार्यों के साथ शोषण का शिकार बन जाती है और उसे यहां तक जेल भी जाना पड़ता है और इसी समय चड्डा को भारतीय सेना में भर्ती हो जाता है।


चड्डी बनियान कंपनी RUPA:-

लाल सिंह चड्ढा का दोस्त था वह भी सेना में था उनकी परिवार चड्डी बनियान बनाने का काम करता था और उनका एक सपना था कि सेना से वापस जब लौटेंगे घर में तो एक बड़ा सा चड्डी बनियान  की फैक्ट्री खोलेंगे और उसको हम चलाएंगे लेकिन  वह कारगिल युद्ध 1999 में वह मारा जाता है। इनके सपना पूरा करने के लिए तीन टेलर मशीनें और कुछ कपड़े खरीदत हैं जिसमें कुल लागत ₹100000 होती है।दुख की बात यह है कि शुरुआत के समय में एक भी चड्डी बनियान नहीं बिकता है लेकिन पहली खरीदारी लाल सिंह चड्ढा की मां करती है। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए हर दुकानदारों मॉलों कपड़ा दुकान में बात करता है एक पर एक पर एक फ्री, एक पर दो फ्री ,एक पर तीन फ्री तक भी कोई भी दुकानदार इस कंपनी को बेचने को तैयार नहीं होता है इसी बीच में पाकिस्तान का घुसपैठ करने वाला मोहम्मद  जो युद्ध करने आया था लेकिन लाल इसे बचाया था इनकी दिमाग से कंपनी का नाम RUPA रखा और फिर इनकी लॉटरी लग गई और कंपनी चल पड़ी जो दुनिया में हर कोई आज रूपा कंपनी का चड्डी बनियान पहनता है।

लाल सिंह चड्ढा का सामाजिक कार्य:-

सामाजिक कार्यों में जब उनका रूपा कंपनी बहुत प्रसिद्ध हो जाता है तो वह दिल्ली में एक बड़ा सा अस्पताल बनाता है अस्पताल अपनी मां की प्रेरणादायक पर बनाता है उनकी मां कहती है बेटा जब भगवान ज्यादा दे दे तो कुछ सामाजिक कार्य में दान करनी चाहिए तो दिल्ली में एक बड़ा सा अस्पताल खोलता है और उसमें काफी उच्च गुणवत्ता का इलाज निशुल्क कराता है और उधर में चड्डी बनियान की कंपनी में भी अच्छी कमाई लेकिन फिर भी लाल को मन नहीं लगता है फिर अपने गांव में भी समय के साथ खेती करने जाता खुद से ट्रैक्टर चलाता और बड़ी पैमाने पर खेती करता था।

सबसे बड़ा परिवर्तन उनकी प्रेमिका का बिछड़ना:-

 लाल सिंह चड्ढा पैरों की समस्या रहा था वह दौड़ नहीं पाता था लेकिन कुछ दोस्तों द्वारा मार पीट से बचने के लिए दौड़ता दौड़ते में पहला परिवर्तन जीवन में आया और वह दोनों पैरों पर दौड़ना फिर बाद में  फौज में आ गया लेकिन 4 साल 7 महीने 3 दिन तक लगातार दौड़ता ही रहा बस ताकि रूपा उनका हो जाए और जीवन खुशी हो के भी अलग सपना था जो उसे करने में लगातार दौड़ रहा था पूरा भारत के मीडिया लोग उसके पीछे दौड़ता हैं अचानक रुक जाता है और कहता है कि मैं थक गया हूं जी वापस घर चलें घर आता है और फिर जीवन में परिवर्तन उसका जीवनसाथी स्वत: चली आती है उनके सपने संघर्ष को देखकर  चिपक जाती है लेकिन दु:ख की बात यह है कि रूपा को बीमारी था और उसी समय मुंबई पुलिस असमाजिक कार्य के लिए उसे गिरफ्तार कर लेती है और 6 महीने के लिए जेल की सजा देती हैं उसका जीवन चंडीगढ़ में बितता है चंडीगढ़ में रहती है और उनका बच्चा हो जाता है जो मैसेज आता है उसको बुलाता है पता चलता है बाकी है तो जीवन का परिवर्तन होता रहा और जीवन में तरह तरह के परिवर्तन से मिलता रहा।


Jai Hind


Share it read for other person 




KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने