रूस-यूक्रेन की युद्ध से विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव


"शांति से ही कायम हो सकती है किसी देश की प्रगति।"



2022 में रूस द्वारा किया गया यूक्रेन पर सैनी करवाई से शेयर मार्केट और विश्व की अर्थव्यवस्था का व्यापार का मार्ग अवरुद्ध हो जाने से अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है ।कई देश रूस के साथ अपनी आर्थिक समझौतों को रद्द करना चाह रही है अमेरिका अपने आर्थिक समझौतों को प्रतिबंध कर दिया गया है इसके अलावा अन्य देश भी रूस के साथ आर्थिक संबंध खत्म करना चाह रहा है क्योंकि इस समय रूस की नजर यूक्रेन पर हैं यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की है जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन है। रूस चाहता है अपने तरीके से यूक्रेन को नियंत्रण करना।युद्ध होती है तो बड़े-बड़े कंपनियां सिर्फ युद्ध होने के उपकरण बनाएंगे बाकी बाकी मानव जीवन से संबंधित वस्तुओं को कम उत्पादन करेगा जिसके चलते महंगाई बढ़ेगी कच्चे माल की कमी हो जाएगी और कई सारे लोगों की रोजगार भी छीन ली जाएगी इसलिए रूस को इस युद्ध को व्यापक नहीं होने देना चाहिए

आर्थिक तंगी और बढ़ेगा कदम:-

आर्थिक तंगी आम भाषा में कहें तो वह है जब लोग अपने दिनचर्या में आपने जीवन से संबंधित है खर्च करने के लिए आय की कमी महसूस करता है और वह अपनी आवश्यकताओं को कम कर दें या काफी कमी महसूस करता है तब वह आर्थिक तंगी समझा जाता है। जब से कोविड-19 आई है तब से विश्व के तमाम देशों में कई देश आर्थिक तंगी  से जूझ रहा है तथा दूसरी समस्या यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध का है ।आंकड़े यह बता रहे हैं कि कई देश के नागरिक का अच्छी संख्या में "आर्थिक तंगी" के शिकार हो गए हैं क्योंकि लॉकडाउन के दौरान में बहुत सारे रोजगार की छटनी से या कारखाने के दरवाजे बंद कर दिया गए हैं। और अभी वर्तमान 2022 में रसिया यूक्रेन का युद्ध भी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने में लग गई है।विकासशील देशों में जहां पर एक भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होती है वही लॉकडाउन स्थिति बन जाने से लोगों को रोजगार नहीं मिल पाने से "आर्थिक अभाव" में जी रहे हैं कई अच्छे -अच्छे लोग आय का अभाव महसूस कर रहे हैं और उनके पूर्ण रोजगार धंधे पर काल मंडराया है और वह क्या करें क्या नहीं करें इसके लिए चिंता में में डूबा हुआ है सरकार भी कई प्रयासों के बावजूद भी उनके पास सही रूप से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है जिसके चलते वह काफी आर्थिक गुलामी या आर्थिक तंगी का महसूस कर रहा है।

दुनिया के सरकारों पर पड़ेगी प्रभाव:-

कोविड- 19 के समय काफी मात्रा में रोजगार घटे हैं और कई लोग तो  रोजगार से हाथ धो बैठे हैं और  ग्रामीण हो या अन्य विश्व के देश हो सभी युवा अपने आप ने ठगे महसूस कर रहे हैं और कहीं ना कहीं सरकार पर आशा बैठा रखे हैं कि सरकार कुछ हमारे लिए करेगी यदि इन भटके हुए युवाओं को सरकार योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध नहीं कराती है तो यह एक ऐसे समय आएगा किए युवा वर्ग अपने काम या रोजगार को लेकर सरकार के प्रति बगावत करने के लिए मजबूर हो सकता है यदि समय रहते सरकार ध्यान देती है तो काफी हद तक विश्व के अन्य देशों के युवाओं को एक अच्छी दिशा दिया जा सकता है।

युद्ध से पड़ेगा रोज़गारो का प्रभाव:-

व्यक्ति तब कमजोर होता है जब वह "आर्थिक रूप" से कमजोर हो जाए यदि उसको हर तरह से काम रोजगार धंधे से मिटा दिया जाए उसे काम नहीं करने दिया जाए तो वह आर्थिक गुलामी में चला जाएगा । संभव हो समय रहते ही विश्व के सभी देश एक साझा योजना पर काम करें ताकि विश्व के सभी बेरोजगार युवा युवतियों को रोजगार मुहैया कराने का कार्य किया जाए वरना हम अपने ही सभ्य सभ्यता को विनाश का कारण बन जाएगा और इतिहास में लिखा जाएगा यह सभ्यता विनाश रोजगार के चलते संपन्न हो गया। तथा कुछ हद तक युद्ध को भी शामिल किया जाएगा जो देशों में अपने वर्चस्व के लिए कमजोर देशों पर हमला करते हैं और उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर देते हैं।

कोरोना की समाप्ति हुई नहीं और एक और समस्या पड़ी:-

2022 में कोरोना की लहर समाप्त हुई नहीं और एक और बड़ी समस्या सामने खड़ा हुई ।रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का माहौल यह जो रूस द्वारा किया गया यूक्रेन पर 2014 में क्रीमिया पर हमला करके उसे अपने अधीन कर लिया। अमेरिका द्वारा किया गया इस युद्ध का नजरअंदाज और मानवता के लिए विनाश का मार्ग कहां है यदि युद्ध बड़े पैमाने पर होती है तो फिर दुनिया आर्थिक मंदी छा जाएगी। वर्तमान में दुनिया के कई देशों ने रूस के साथ आर्थिक समझौते को समाप्त कर रही है जिसके चलते देश के औधोगिक संस्थानों में उनकी रोजगार पर असर पड़ेगा और कई लोग बेरोजगार की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे कई देश की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर रूस के साथ जुड़ी हुई है खासकर यूरोप की अर्थव्यवस्था में रूस की बड़ी भागीदारी है ।बड़े-बड़े कंपनियों में इनकी शेर क्षमता अधिक है तथा दुनिया के शेयर मार्केट में रूस की भागीदारी भी अधिक है दुनिया के तमाम देश आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं तो कई कंपनियां दिवालिया हो जाएगी और कई सारे लोग सड़क पर आ जाएंगे।

धन्यवाद

KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

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