रूस शांतिपूर्वक से हल करें आपने पड़ोसी देश यूक्रेन के साथ समझौता सबकी भलाई शांति समझौते में कायम

" अपने वर्चस्व के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है रूस"


रूस द्वारा किया गया यूक्रेन पर सैनिक कार्रवाई एक प्रकार से पूरी दुनिया का चिंता का विषय बन गया है। रुस की कार्रवाई से पूरे दुनिया की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार गीरती नजर आ रही है।रूस ने चारों तरफ से यूक्रेन पर हमला की योजना तैयार कर ली है, और उसे घेरने के लिए उनके बंदरगाह ,15 परमाणु संयंत्र, सेना की सुरक्षा विभाग के तकनीकी पर साबर हमला लगातार कर रखा है और उसे गेरे की नीति में घेर रखा है। यूक्रेन को चारों तरफ से घेर लिया गया है। और लगातार गोला बारूद और सैनिक कार्रवाई कर रही है।

यूक्रेन की प्रतिक्रिया:-

यूक्रेन आपने नागरिकों को बाहर निकलने के लिए 18 से 60 साल के लोगों को प्रतिबंध कर दिया गया है। रूसी सेना से लड़ने के लिए सभी को हथियार दिया जा रहा है। यह हथियार अमेरिका और अन्य देशों से मंगाई गई है ताकि यूक्रेन नागरिक रूसी सेना से आपने सुरक्षा प्राप्त कर सके। यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की आपने नागरिकों से अपील किया है कि वह यूक्रेन को छोड़कर ना जाए उन्हें सुरक्षा के लिए हथियार दिया गया है ताकि रूसी सेना से मुकाबला कर सके यदि कोई नागरिक यूक्रेन से कहीं जाता है तो उसे गोली मार दिया जाएग।  नागरिकों को शांति बनाए रखने की अपील की है और पूरी तरह से यूक्रेन सैनिकों का सहयोग करें। यूक्रेन के सुरक्षा व नागरिक  रूसी हमले में 2000 से अधिक लोग मारे गए हैं।


दुनिया के विभिन्न देशों की सैनिक क्षमता:

 ग्लोबल फायरपावर रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की सबसे बड़ी सैनिक क्षमता अमेरिका के पास है तथा दूसरी सैनिक क्षमता रूस के  उसके पास है तीसरी क्षमता चीन के पास है और सैनी के मामले में चौथा सबसे शक्तिशाली देश भारत है पांचवा जापान है। सातवां में फ्रांस। आठवां ब्रिटेन है। 9वां पाकिस्तान है और 10 वे स्थान पर  ब्राजील है। रूस अपने सैनिक क्षमता यूक्रेन के माध्यम से अपनी दुनिया को दिखाना चाहता है। जबकि पहले स्थान पर अमेरिका की सेना अपने नाटो के माध्यम से पूरे दुनिया को दिखाना चाहता है कि उनकी सेना सबसे समृद्ध और मजबूत है लेकिन यहां यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमरीका के सुरक्षा प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और उसे अपने देश में किसी प्रकार की सहायता के लिए इंकार कर दिया है जबकि अमेरिका राष्ट्रपति बाइडन का कहना है यदि पोलैंड, वर्सीय तथा अन्य यूरोपीय देशो पर या नाटो में शामिल देश पर रूस  किसी प्रकार की हमला होती है तो अमेरिक युद्ध मे प्रवेश करेगा जिसके चलते बड़ी हानि हो सकती है ।



यूक्रेन- रूस युद्ध में हथियार बनाने वाली कंपनियों का लाभ:-

मौजूदा तनाव और युद्ध के चलते सबसे अधिक लाभ विश्व में हथियार बेचने वाली कंपनियों की होगी ये कंपनियां आपने कारोबार बड़े पैमाने पर बढ़ाएगी और लाभ अर्जित करेगी क्योंकि भारत समेत अन्य देशों को यूक्रेन -रूस युद्ध में शामिल होने के लिए हथियार की आवश्यकता होगी। कंपनियां सैनिक उपकरण के औजार बनाते हैं उनसे खरीदना होगा तभी किसी भी देश इस युद्ध में शामिल हो सकता है तभी वह अच्छा प्रदर्शन कर पाएगा। सैनिक उपकरण में कंपनियां सबसे अधिक अमेरिका और यूरोप की है और एक प्रकार से बड़ी मात्रा में विक्रेता भी है ।भारत आपने लगभग 60% रक्षा सामग्री और उस पर निर्भर है क्योंकि क्योंकि भारत इस समय रूस के साथ किसी प्रकार की व्यापार की गतिविधियां सुस्त पड़ी हुई है और भारत आपने सुरक्षा के लिए अन्य देशों के साथ या कंपनियों के साथ समझौता कर सकता है। कहावत है यदि युद्ध में कंपनियां आ गई तो युद्ध बड़े पैमाने पर होती है क्योंकि कंपनियां उपकरण औजार की सारी सुविधा उपलब्ध कराती है ताकि किसी भी देश अपने संघर्ष लड़ाई जारी रखें।। 



यूक्रेन-रूस युद्ध में भारत देश के प्रमुख नरेंद्र मोदी की नजरिया:-

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय दुनिया का सबसे समृद्ध और शक्तिशाली प्रधानमंत्री में से एक है इनकी बातें दुनिया पर असर पड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की है और उन्हें कूटनीतिक तरीके से इस समस्या का समाधान करने का आह्वान किया है क्योंकि दुनिया में रूस की भूमिका शांति पूर्वक की छवि है इस मामले में रूस,यूक्रेन से बातचीत के माध्यम से तय करें और यूक्रेन की भी मांग है भारत की तटस्था समय के अनुरूप है और उन्हें किसी भी प्रकार से दोनों के विरुद्ध जाने की आवश्यकता नहीं है ऐसी सोच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की है। हाल में भारत सबसे अधिक अपनी नजदीकी अमरीका के साथ है अमेरिका का राष्ट्रपति बाईडन का कहना है भारत इस मामले में खुलकर अपना समर्थन दें यानि एक प्रकार से अमेरिका भारत को युद्ध में शामिल करना चाहता है । भारत के संबंध में खटास उत्पन्न करना चाहता है जो भारत कभी नहीं करेगा ।भारत हमेशा दोनों को देखकर अपना निर्णय लेगा तथा हो सके तो भारत अपनी गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करेगा। यदि भारत रूस के खिलाफ जाता है तो रूस भारत के सैनिक हथियार समझौते से पीछे हट जाएगा और भारत को एक प्रकार से आपने सैनिक सुरक्षा उपकरण को लेकर समस्या उत्पन्न हो जाएगा।



यूक्रेन - रूस से आम लोगों की तकलीफ:-

इससे आम लोगों की जीवन से संबंधित मौलिक और आवशयकतो की अभाव हो जाएगा। युद्ध के चलते सारा देश युद्ध में व्यस्त हो जाएगा उत्पादन कार्यों में सिर्फ रक्षा उपकरण के समान बनाया जाएंगे आम उपभोक्ता की जीवन से संबंधित भौतिक वस्तुएं या उपभोग की वस्तुएं को नजरअंदाज कर दिया जाएगा क्योंकि इस समय दुनिया के किसी भी देश अपने आप पर निर्भर नहीं है हर देश किसी ने किसी पर निर्भर हैं खासकर ऊर्जा के क्षेत्र में यूरोप के अधिकांश भागों में भारत सहित रूस की बड़ी भूमिका है गैस के क्षेत्र में तेल के क्षेत्र में क्योंकि जीवन में भोजन के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है और भोजन बनाने के लिए सबसे अधिक मात्रा में एलपीजी गैस का प्रयोग होती है युद्ध बड़े पैमाने पर हो जाती है तो हमें ऊर्जा का संकट करना पड़ेगा और अधिक मात्रा में हमें अन्य देशों से गैस खरीदना होगा इस युद्ध में कई देशों का अधिक लाभ होगा तो कई देश कंगाल हो जाएंगे और खासकर वह देश जो विकासशील देश हैं जिनकी जनता की राष्ट्रीय आय बहुत ही कम है ऐसे लोगों की कमर टूट जाएगा। बड़ी कंपनियां चाहेगा युद्ध चलता रहे और सैनीक के सामान बिकता रहे लेकिन एक बड़ा आवाम पूरी तरह के दाह में चली जाएगी और निर्दोष नागरिक भी इसमें मारे जाएंगे युद्ध से तो मरेंगे ही इसके अलावा भूखमरी बेरोजगारी से भी मर जाएंगे।

शक्तिशाली देशों का  वीटो पावर:-

सुरक्षा परिसर में रूस के प्रति निंदा प्रस्ताव लाया गया है क्योंकि रूस ने अपने तरीके से यूक्रेन पर हमला कर दिया है सुपर पावर देश में 5 देश शामिल है अमेरिका ,ब्रिटेन, फ्रांस ,चीन और रूस यह सभी देश मिलकर ही पूरा दुनिया में किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान करते हैं यदि 4 देश किसी भी देश की प्रस्ताव को निंदा करता है देश यदि इसका बहिष्कार करता है या बैठक में शामिल नहीं होता है तो वह समझौता या विधायक ठंड हो जाती है इसी प्रकार से सुरक्षा परिषद द्वारा लाया गया पस्ताव रूस शामिल नहीं हुआ जिसके चलते यह प्रस्ताव बेकार माने गई क्योंकि सुपर कंट्री के कानूनों में कहा गया लिखा गया है की पांचों देशों की सर्वसम्मति पर ही फैसला होगा। अमेरिका पूरी तरह से रूस पर कूटनीतिक दबाव डालना चाहता है और पुतिन को एक कटघरे में खड़ा करना चाहता है जबकि रूस की अलग नजरिया है वह चाहता है कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश बन कर रहे और किसी भी देश को यूक्रेन में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं समझता है यदि किसी भी देश यूक्रेन मैं हस्तक्षेप करता है तो रूस अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करेगा और उसे कड़ाई से निपटेगा।



 रूस युद्ध न करके कूटनीतिक तरीके से समस्या का समाधान करने चाहिए क्योंकि अभी अभी पूरी दुनिया को Cov-19 से ग्रसित है और विश्व के लगभग सभी देश की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी हुई है हर कोई अपने जीवन से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं।युद्ध बड़े पैमाने पर हो जाती है तो पूरी दुनिया में एक और समस्या खड़ी हो जाएगी जिसके चलते कई सारे लोगों को रोजगार छीन ली जाएगी कई लोग मारे जाएंगे। यथासंभव हो तो रूस अपने कूटनीतिक तरीके से शांतिपूर्वक से यूक्रेन के साथ समझौता करें और एक तीसरे विश्व युद्ध होने से टल जाए ताकि मानव कल्याण के साथ विश्व मानवता भी मना रहे हैं क्योंकि युद्ध में निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं सरकारें तो अपना वर्चस्व रखती है खामियाजा जिन लोगों को भरना पड़ता है और युद्ध की जख्म कभी खत्म नहीं होती है। भारत भी आपने अच्छी नजरिया रखें जितना संभव हो सके भारत शांति के लिए अपना कदम उठाए अन्यथा गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करनी चाहिए।

जय हिंद

KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

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