"विश्व में मंडराने लगी है तीसरे विश्व युद्ध"कई देश हो जाएंगे आर्थिक कंगाल"
रूस की घेराव की नीति:-
रूस और यूक्रेन को चारों तरफ से घेर रखा है और उस पर अपनी सैनिक कार्रवाई कर रहा है। यूक्रेन की राजधानी कीव को घेरकर लगातार गोला बारूद और बड़े-बड़े सायरन की आवाज में गोला बारूद दागे जा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी सेनाओ को बड़ी मात्रा में छाती पहुंचाई है जबकि रूस का यह दावा है कि हम जल्द ही कीव को कब्जे में लेंगे और वहां पर अपने तरीके से एक सरकार स्थापित करेंगे यह शायद रूस की कूटनीतिक का हिस्सा है। यूक्रेन और रूस के बीच बेलारूस गई शिष्टमंडल की वार्ता विफल हो चुकी है। रूस लगातार कह रहा है यूक्रेन आत्मसमर्पण कर दे नहीं तो मैं अपनी परमाणु मिसाइलों को हर समय तैयार रखा हूं। रूस में परमाणु मिसाइल के कर्मचारी को छुट्टी रद्द कर दी गई है और उनके कर्मचारियों को 24 घंटा तैयार रखा गया है किसी भी समय रूस ,यूक्रेन पर हमला कर सकता है यदि परमाणु बम हमला हो जाता है तो कई वर्षों तक यूक्रेन की कमर टूट जाएगी।
यूक्रेन की मदद का आह्वान:-यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की विश्व के देशों से आग्रह किया है रूस के आर्थिक संबंधों के इकरारनामा को खारिज कर दें सभी रूसी विमान को अपने देश में आने के लिए प्रतिबंध लगा दे।एक प्रकार से पूरा रूस को अलग-थलग करने के लिए यूक्रेन लगा हुआ है। यूक्रेन रूस के दक्षिणी भाग में स्थित है और एक "बफर जोन" के रूप में स्थित है यह रूस और यूरोप के बीच में स्थित हैं जो स्वतंत्र रहकर अपनी सरकार को स्थापित करना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति वाईडन का कहना है कि अमेरिका रूस के प्रति पलटवार करेगा जबकि अन्य देशों की मनसा यूक्रेन के मुद्दे पर शांति वार्ता चाहता है। यूरोपियन देश के 28 सभी देश यूक्रेन को सहायता के लिए खड़े हो चुके हैं। यूक्रेन की राजधानी कीव में सड़क पर अवरोधक लगा दिए गए हैं सभी वाहनों को जांच कर अंदर आने दिया जा रहा है किसी भी प्रकार की अनहोनी के लिए धारा 144 लागू किया गया है ताकि राजधानी में शांति व्यवस्था कायम रहे अपने देश के नागरिकों पर भी कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं जिसकी ने 18 से लेकर 60 साल की उम्र तक किसी भी को देश छोड़ने का अनुमति नहीं होगा यदि कोई देश छोड़ता है तो उसे गोली मार दिया जाएगा।
इस युद्ध में भारत की प्रतिक्रिया:- भारत सरकार ने यूक्रेन को मानवता की सहायता के लिए कदम बढ़ाया है। भारत सरकार यूक्रेन में फंसे सभी भारतीयों को ऑपरेशन गंगा के माध्यम से देश से निकाल रहे हैं जबकि भारत का दूतावास ने सलाह दिया गया है हर संभव भारतीय यूक्रेन को छोड़ दें। भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार का अच्छी खासी भागीदारी है। भारत अधिक मात्र में यूक्रेन को मानवीय जीवन से संबंधित दवाओं का निर्यात करता है जबकि यूक्रेन भारत को 74% सूरजमुखी तेल का आयात करता है। युद्ध के चलते व्यापार यातायात बाधित हुआ है जिसके चलते भारत में खाद्य तेल महंगे हो जाएंगे जबकि भारत वर्तमान में यूरोपियन देशों के सहारे अपनी ऊर्जा की आपूर्ति भी करता है युद्ध छोड़े जाने से भारत में ऊर्जा से संबंधित ईंधन नहीं पहुंच पाने के चलते पेट्रोल डीजल के दाम $100 से पार कर चुकी है।
सुरक्षा परिषद की सभी बैठके त्वरित हो रही है जबकि किसी भी प्रकार की एक को उच्चतम निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं। क्योंकि रूस पांच शक्तिशाली देशों में से एक है यदि किसी देश है की असहमति हो जाने से कोई भी विधेयक पारित नहीं होता है। भारत सरकार रूस यूक्रेन के मुद्दे पर उच्च स्तरीय की बैठक रखी है भारत इस युद्ध में मानवता की नजर रखते हुए मानवता का ख्याल रखते हुए तटस्थ रहकर आपने उचित नीतियों का पालन करेंगे भारत खुद एक शक्तिशाली देश है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैनिक भारत के पास है । भारत इस युद्ध में किस देश का सहयोग करेगा यह कहना अभी उचित नहीं है क्या भारत संभावित विश्व युद्ध में शामिल होगा या नहीं होगा यह हमें देखना है तथ संभव हो सके भारत इस युद्ध से दूर रहें क्योंकि भारत की अपनी आवश्यकता है भारत में अनेक प्रकार की समस्याएं हैं गरीबी बीमारी भुखमरी शिक्षा व्यवस्था ठीक-ठाक नहीं है भारत सरकार को अपने देश के विकास में ज्यादा सहयोग करने चाहिए और यथासंभव युद्ध से दूर रहने चाहिए। भारत विश्व गुरु होने के नाते भारत अपनी ज्ञान और कूटनीतिक तरीके से इस युद्ध को समाधान करने में सहयोग करनी चाहिए ना कि आनन-फानन में होकर उल्टा निर्णय कर दें जिससे भारत को नुकसान हो जाए।
जय हिंंद