ऑनलाइन शिक्षा से होने वाले नुकसान , ऑफलाइन शिक्षा ही सही रूप में कारगर है

 "शिक्षा वह कुंजी है जो बंद किस्मत की ताला को खोल देती हैं।"

ऑनलाइन शिक्षा से आंखों की रोशनी जाना :-

घंटों पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी स्क्रीन को देखते रहते हैं जिसके चलते उनकी आंख की रोशनी चली जाने की संभावना पूरी रह जाती है और लगातार स्क्रीन को देखने से उनकी आंख भी खराब हो जाती है और उसे कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। आंख के साथ-साथ हमारे शरीर में लोग के साथ-साथ कमजोरी और बेचैनी जैसा महसूस एक बड़ी वजह है क्योंकि हमारी आंख 15 से 20 मिनट तक ही स्क्रीन पर टिक सकता है इसके बाद आंखें दर्द जलन या थक जाती है अधिक देखने से आंख की रोशनी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

विद्यार्थियों की Doubt क्लियर नहीं होना:-

विद्यार्थियों को अक्सर ऑनलाइन शिक्षा में शिक्षकों से अच्छी तरह से संपर्क नहीं हो पाते हैं और विद्यार्थी कई मायनों में अपने टीचर से आपने विषय से संबंधित बातें पूछ नहीं पाते हैं और उस विषय पर और उसी टॉपिक पर वह संशय बना रहता है जिसके चलते बच्चों को एक प्रकार से परेशानी का समस्या उठाना पड़ता है जिसमें सफलता में बाधा बन जाती है।

बच्चे और शिक्षक का संपर्क ना होना:-

 संपर्क होने शिक्षक का व्यवहार उनकी रहन-सहन, पहनावा उढ़ावा ,विचार आदान-प्रदान होता है लेकिन ऑनलाइन शिक्षा हो जाने से बचे और शिक्षक के बीच में संपर्क नहीं होने के चलते उन्हें एक अच्छे नैतिक शिक्षा का विकास नहीं हो पाता है जिसके चलते बच्चे अनुशासनहीनता की ओर चले जाते हैं और एक प्रकार से कहे तो वह संपर्क न होने से टीचर और बच्चों के बीच में प्रेम भाव भी उत्पन्न नहीं हो पाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी:-

 भारत में एक बड़ी विशाल जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है आज भारत के कई क्षेत्रों में  ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और सम्मान कॉल की कनेक्टिविटी भी कमजोर है। टेलीकॉम कंपनियां एक बेहतर नेटवर्क नहीं दे पा रही है जिसके चलते बच्चों में ऑनलाइन शिक्षा की भारी कमी और कई प्रकार के समस्याओं का सामना करने पड़ती है। अक्सर बिजली की समस्या रह जाने से तकनीकी चार्ज नहीं हो पाती है और सही ढंग से काम नहीं कर पाती है यदि कोई बच्चा ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाई कर रहा है तो वह घर के अंदर पढ़ाई नहीं कर पाएगा क्योंकि उसके घर तक सही नेटवर्क नहीं पहुंच पाता और वह घर से बाहर नहीं पढ़ पाएगी बाहर में अन्य विचारों और शोरगुल की समस्या होती है और नेटवर्क भी उचित स्थान पर ही पकड़ते हैं एक प्रकार से खतरा भी बना रहता है कि पढ़ाई में अधिक जम गया ऊंचे स्थान से वह गिर सकता है या कुछ भी समस्या के घट सकती है नेटवर्क गायब होना यह एक आम समस्या बन जाती है।

ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की पहुंच:-

आज ही भारत की विशाल जनसंख्या में कई क्षेत्रों में बिजली नहीं है या बिजली ना होने के चलते कई आधारभूत संरचनाएं उनके जीवन से संबंधित कार्य नहीं चल पाती है और आज भी बिजली की पहुंचे ना के बराबर हैं पढ़ने के लिए एक अच्छी माहौल और पूरा बिजली लाइटिंग व्यवस्था कुछ भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता होती है जो उसे पूरा नहीं मिल पाती है इस प्रकार से देखें तो भारत की विशाल जनसंख्या गांव में रहती है जो एक प्रकार से ऑनलाइन कि बढ़ावा हम करते हैं तो उसे बेहतर आधारभूत संरचना प्रदान करनी होगी वरना हम ऑनलाइन की शिक्षा में पूरे भारत की भाग्यविधाता को अंधेरा में धकेल देंगे क्योंकि भारत की 70% आबादी गांवों में रहती है अधिकांश बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों में  ही रहते हैं

इंटरनेट का महंगा होना:- 

आज भी भारत में टेलीकॉम कंपनियां भारी भरकम मात्रा में अपने टेलीकॉम डाटा प्लान बेच रही है जिसमें भारत की ग्रामीण जनसंख्या गरीब वर्ग इस डाटा को नहीं खरीद पा रही है और अच्छे-अच्छे एप्लीकेशन चलाने के लिए काफी बड़ी मात्रा में डाटा की खपत होती है जिसे आम आ दमी से भरपाई नहीं कर पाते हैं । ऑनलाइन शिक्षा एकाधिकार बाजार की और चली जाती है और कई मायने में हमें जितना फीस नहीं देना पड़ता है ना कहीं न कहीं इंटरनेट की खर्च अधिक चली आती है। हमें डेटा के लिए हमें पैसे चाहिए आज भी आपको पता है कि भारत की एक विशाल जनसंख्या गरीबी रेखा से संबंधित है भारत को एक बहुत बड़ा वर्ग को निरक्षरता में भेज देगी।



ऑनलाइन शिक्षा से बाजार का मंदी होना:-

आनलाइन शिक्षा कई प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है यदि कोई बच्चा पढ़ने के लिए घर से बाहर निकलता है तो वह ऑटो किराया के साथ-साथ अपने जीवन से संबंधित खाने-पीने और अन्य खर्चों को भी वहन करना पड़ता है और कहीं न कहीं भारतीय बाजार में उपस्थित होकर छोटे-मोटे व्यापारियों को फायदा या दुकान से आने वाले गरीब लोगों को भी फायदा होता है। एक बच्चा घर से बाहर निकलता है पढ़ाई करने के लिए तो बाजार को कई प्रकार सेवा व सहयोग करता है। किताब व पेंसिल जीवन व पढ़ाई से संबंधित चीजों की खरीदारी करता है या खाने पीने चाय ,समोसा, इटली, डोसा या अन्य खाद्य वस्तुओं को भी वह इस्तेमाल करता है तो इस प्रकार से देखें कि हर प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था को एक विद्यार्थी सहयोग करता है और इसे आनलाइन कर देते हैं तो विद्यार्थी घर में बैठा रहेगा और हमारे जो आर्थिक गतिविधियां  मंद पड़ जाएगी हमारे अर्थव्यवस्था को भी डैमेज कर देगी ।

आनलाइन शिक्षा से किताबों की दुनिया से हटना:-

घंटों देर मोबाइल में समय बिताने के बाद विद्यार्थी की  कंसंट्रेशन यानी ध्यानकेन्द्रित  किताबों पर नहीं बन पाता है और वह किताबों की दुनिया से पीछे हट चला जाता है और उसे किताब पढ़ने में कोई दिलचस्पी नहीं हो पाता है और धीरे-धीरे किताबों की दुनिया से उसके दिमाग हटने लगता है यदि कोई विद्यार्थी एक किताब को पढ़ाता है घंटों समय तक तो उसके अंदर में बोलने की शक्ति ,समझने की शक्ति ,लिखने की शक्ति ने नए शब्दों को समय ने पहने उसका भावार्थ जाने की शक्ति विकसित हो जाती है और वह घंटों समय तक ध्यान केंद्रित रहकर किसी चीज को आसानी से समझ पड़ सकता है लेकिन ऑनलाइन शिक्षा हो जाने से यह किताबी दुनिया से हट जाती है और कहे तो हमें सही जीवन में बढ़ने के लिए रोक रहा है।

आपसी प्रेम भाव की कमी होना :-

जब हम विद्यालय स्कूल ,कॉलेज ,ट्यूशन ,कोचिंग जाते हैं तो हम कई सारे लोगों से बातचीत करते हैं‌। बातचीत में हम अन्य प्रकार चीजों को सीखते हैं जीवन में उतारते हैं अच्छे अच्छे लोगों टीचर, विद्यार्थी, क्लास का सीनियर ,जूनियर या प्रिंसिपल कई प्रकार की बातें होती है जो बच्चे सीख पाते हैं जो आनलाइन मे नहीं मिल पाती है इसके अलावा लोगों की दोस्ती प्रेम भाव भी बना रहता है और उनके जीवन से संबंधित आपसे सभ्यता संस्कृति का आदान-प्रदान होता रहता है कहीं ना कहीं सभ्यता संस्कृति प्रेम भाव से बना रहता है। ऑनलाइन शिक्षा से हमारे सभी गतिविधियां में संचालित न होनी देती है और हमें फिजिकल रूप से भी मैं कमजोर करता  क्योंकि स्कूल कॉलेज टूव्शन हमें पैदल या साइकिल चलाकर जाना पड़ता है इसके अन्य सुविधाएं भी हम जब जाते हैं तो हमारे शरीर का फिजिकल भी बना रहता है लेकिन ऑनलाइन हो जाती है तब हमारे बाहरी गतिविधियों बंद हो जाती हैं जिसके चलते कई प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ता है। 

ऑनलाइन शिक्षा का हाइब्रिड:-

 शिक्षा का हाइब्रिड हो जाने से हमें कई प्रकार से हमारी अर्थव्यवस्था ,फिजिकल, हमारी मानसिक विकास के साथ कई  समस्याओं का सामना करना पड़ेगा लेकिन आनलाइन शिक्षा वैसे विद्यार्थी के लिए अच्छे हैं जो काफी सीनियर है जो दूर की शिक्षा प्राप्त नहीं करना पा रहे हैं तो उनके लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी, स्कूल कॉलेज  विकल्प हो सकती है लेकिन कुछ मात्रा में ही काफी है। हम पूरी तरह से भारत में आनलाइन शिक्षा लागू नहीं कर पाएंगे क्योंकि लागू कर देते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी। वे लोग एजुकेशन सेक्टर से जुड़े हुए हैं जिसका एक डिजिटल प्लेटफार्म पर आना संभव नहीं व बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी प्रवेश हो चुका है छोटे-छोटे स्कूल, कॉलेज चलाने वाले लोगों के लिए खतरा है क्योंकि वह अचानक नई इलेक्ट्रॉनिक सेटअप नहीं कर पाएंगे क्योंकि  परंपरा पर आधारित शिक्षा की तकनीकों में खर्च कर चुका है लेकिन आधुनिक शिक्षा के तकनीक अभी उनके पास उपलब्ध नहीं है जो काफी महंगी है और लोग अभी उसको खर्च करने योग्य भी नहीं है मैं ऑनलाइन शिक्षा की बात करता हूं लेकिन 99% ऑफलाईन हम बात करते हैं क्योंकि ऑफलाइन शिक्षा से हमे वास्तविक चरित्र, वास्तविक फिजिकल, वास्तविक बौद्धिक,  तभी सफलता  संभव होगा।

जय हिंद

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Thankyou 




KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

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