राष्ट्रवाद है जिसमें एक संस्कृति के लोगों को अपने देश के प्रति प्रेम में बांधे रखता है और उसे हर पल अपने देश को याद करते हैं।
पाकिस्तान शब्द का जन्म सबसे पहले बार 1930 में शायर मोहम्मद इकबाल ने भारत के उत्तरी पश्चिमी चार प्रांतों को मिलाकर एक नए राष्ट्र बनाने का सुझाव दिया था जबकि वास्तविक रूप से पाकिस्तान शब्द का जन्म 1933 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला है छात्र चौधरी रहमत अली ने पाकिस्तान शब्द को गढ़ा और यही शब्द आगे चलकर एक नया राष्ट्र पाकिस्तान के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
पाकिस्तान प्रस्ताव:-
इसका पहली बार 23 मार्च 1940 को पाकिस्तान प्रस्ताव को प्रस्तुत किया गया लाहौर अधिवेशन में सबसे पहली बार पाकिस्तान मांग की औपचारिक रूप से रखी गई जिसमें कहा गया है कि एक नया पाकिस्तान राष्ट्र होगा इसलिए यह अधिवेशन पाकिस्तान प्रस्ताव के नाम से भी जाना गया। इस सम्मेलन के अध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा किया गया था और पाकिस्तान को लेकर एक नई राष्ट्र को लेकर विचार विमर्श हुआ और इसी पर आगे की कार्रवाई शुरू हुई हुई।
पाकिस्तान की मांग के लिए विभिन्न प्रतिक्रिया हुई है-
@.23 मार्च 1940 में लाहौर अधिवेशन ने पाकिस्तान की मांग हुई ।
@.फिरोज नून ने धमकी दिया यदि ब्रिटिश सरकार एकता को थोपेंगे तो मुसलमानों बरपाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
@. मोहम्मद अली जिन्ना ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट इटली से गुहार लगाई मुसलमानों को अपना खून बढ़ाने के लिए मजबूर ना किया जाए।
@. मोहम्मद अली जिन्ना ने 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्रवाई के माध्यम से जिन्होंने संविधान और संवैधानिक तरीकों को अलविदा कहा अब हमारे पास पिस्तौल है यानी कि जिन्ना विद्रोह के लिए तैयार हो गए हैं और उसने सभी मुसलमानों को एक नए राष्ट्र बनाने के लिए का आह्वान किया।
सीधी कार्रवाई में पहला उपद्रव कोलकाता में हुआ यहां पर H.S सुहरावर्दी के नेतृत्व की सरकार थी इन्होंने दंगाइयों को बढ़ावा दिया और उस दिन सरकारी आवास की घोषणा करते हैं दंगाइयों को पूरा मौका मिल जाता है और यह लोग संप्रदायिक दंगे में लग जाते हैं जिसके चलते 24 घंटों में लगभग 7000 लोग मारे जाते हैं और कई घायल बेघर है और उनके साथ गलत व्यवहार किया जाता है तथा बलात्कार की घटनाएं घटित हुआ इस घटना को पंडित जवाहरलाल नेहरु सरदार वल्लभभाई पटेल ने निंदा किया। दूसरी दंगा में 10 अक्टूबर 1946 को नोआखाली में हुआ जहां पर दंगाइयों ने लोगों के निहत्थे जान लिए हत्याओं के अलावा महिलाओं का अपहरण किया जबरन विवाह किया बलकार सी घटनाएं हुआ।
जिन्ना की सीधी कार्रवाई से भारतीय सचिव का वक्तव्य:-
राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि सरकार ही अतिशयोक्ति पूर्ण तरीके से हिंदुओं पर आक्रमण करने के लिए सरकार ने ही योगदान दिया यानी सरकार की रवैया के चलते ही कोलकाता दंगे नोआखाली दंगे जैसे घटना घटी लेकिन यह सच नहीं है कि हम एक नए राष्ट्र बनाने के लिए किसी की लोगों की जान ले हम शांतिपूर्वक से आंदोलनरत तरीके से एक नए राष्ट्र की मांग कर सकते हैं किसी भी राष्ट्र के लिए बनना खून खराबा अच्छी नहीं होती है।
सीधी कार्रवाई की संप्रदायिक दंगे छोड़ गए तो भारतीय नेताओं में प्रसिद्धि महात्मा गांधी ने अपने तरीके से कार्य किया शांति करने के लिए सीधे नोआखाली गए 6 नवंबर 1946 को वह वहां पर पहुंचे-
@. हिंदू मुस्लिम को एक साथ लने में सफल हुए क्योंकि उस समय का सबसे प्रसिद्ध और सबको बात मानने के लिए महात्मा गांधी ही उपयुक्त थे।
@. मुसलमानों द्वारा किया गया संप्रदायिक दंगाई कार्यों में मुसलमान लोगों को ही अपने कर्मों पर पछतावा करना पड़ा अपने आपको गलती महसूस किया।
@. सांप्रदायिक एकता का निर्माण कराया गया जिसमें से सभी लोग एक साथ मिलकर कार्य करें।
@. काफी हद तक मामला को शांत कराया गया महात्मा गांधी के प्रयास काफी सफल हुए।
@. महात्मा गांधी ने नोआखाली में प्रार्थना सभाओं में हिंदू- मुस्लिम के घरों की दौरा किया ।
@.हिंदुओं को घर वापस आने की परामर्श दिया कई लोग भी लौटे क्योंकि दंगे में हिंदू मुस्लिम दोनों बेघर हो चुके थे एक दूसरे को मार काट रहे थे। गांधीजी की अपील से काफी हद तक शांति हो चुकी थी।
महात्मा गांधी ने दंगाइयों को शांत कर रहे थे संप्रदायिक मामले को सुलझा रहे थे आपसी भाईचारा को समझा रहे थे लेकिन कोलकाता की सरकार सुहरावर्दी ने कहा-
"फिर से मुस्लिम तेंदुआ और हिंदू बच्चों को साथ रहने के लिए एक दर्जन गांधीओं की जरूरत पड़ेगी।"
यानी कि सरकार की जो प्रतिक्रिया गांधी की शांति व्यवस्था के प्रति खिलाफ में थी यह कोई भी सरकार का उचित कदम नहीं होती है सरकार ही खुद दंगा को सहयोग करें तो वह कैसी सरकार रहेगी सरकार की नाकामी से ही बंगाल दंगा सीधी करवाए में हिंदू मुस्लिम की मौत सरकार की जिम्मेवारी जाती है जो ऐसी सरकार को नहीं करनी चाहिए।
सीधी करवाएगी दंगा यानी कि सांप्रदायिक दंगा जल्द ही भारत के अन्य क्षेत्रों में बढ़ने लगे बिहार के पटना, गया ,मुंगेर जिलों में फैल गया इस क्षेत्र पर हिंदू लोग मुसलमानों पर हमला किया जिसमें कई मुसलमानों की अपनी जानें गंवानी पड़ी और इस सभी के दोष सरकार की शासन व्यवस्था अंग्रेज की जबरदस्ती नीतियां को ही जाती है क्योंकि सरकार अंग्रेज की थी तो जिम्मेवारी अंग्रेज सरकार को ही जाती है पटना ,गया ,मुंगेर जिलों की घटना में इस प्रकार से हानि हुआ-
@. 5000 लोगों की जाने गई बिहार के क्षेत्रों में
@. वायसराय ने 10 से 20000 तक लोगों की मृत्यु को स्वीकार किया यानी कि सांप्रदायिक दंगे के नाम पर इतनी भारी संख्या में बेरहमी से लोगों को मारा गया।
@. बिहार के क्षेत्रों में दंगा को शांत करने के लिए महात्मा गांधी बिहार जा सकते थे 2 मार्च 1947 को लेकिन नवंबर 1946 में ही दंगा के बारे में सुना था वह अलग क्षेत्रों में शांति अपील कर रहे थे यानी कि सांप्रदायिक दंगा आग की तरफ फैला।
बिहार के अलावा भारत के क्षेत्रों में सांप्रदायिक दंगे का फैला हुआ पंजाब के क्षेत्र में रावलपिंडी, कोलकाता ,नोआखाली, बिहार में फैली और एक प्रकार से भारतीय क्षेत्रों में ही गृह युद्ध की भावना में फेंक दिया गया और आपसी भाईचारे को समाप्त किया जिसके चलते आज भी भारतीय हिंदू मुस्लिम की एकता पर निगाह से देखी जाती है लेकिन सरकार सही हो अच्छे ढंग से राज्य प्रशासन देश के प्रशासन संसद करती हो तो सांप्रदायिक दंगे का नामोनिशान नहीं रह पाती हैं सरकार के हाथों में ही सभी प्रकार के शांति व्यवस्था विद्रोह निहित होती है।
पाकिस्तान की मांग को लेकर मुस्लिम लीग ने हिंसा का सहारा लिया कांग्रेस को इसका समाधान के लिए मजबूर कर दिया बंगाल ,बिहार, पंजाब में सांप्रदायिक दंगों की पूरी तरह श्रृंखला बना दी गई। सरकार के निर्देशों पर कोलकाता दंगे के कई निरर्देश आम जनों को निशाना बनाया गया। मोहम्मद अली जिन्ना सविनय अवज्ञा आंदोलन पर जा सकते थे। शांतिपूर्वक से पाकिस्तान की मांग कर सकते थे। ब्रिटिश सरकार को मजबूर कर सकते थे ।और एक नया पाकिस्तान राष्ट्र बना सकते थे। लेकिन जिन्ना ने संप्रदायिक तथ्यों का सहारा लिया जिसके चलते अपने ही लोगों की जानें गई भले ही नया पाकिस्तान की मांग और एक नया राष्ट्र बना हो लेकिन हम उस दर्द और दुख को नहीं भूल पाएंगे जो अपने ही देश में अपने ही परिवारों के लोगों को खोया।
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धन्यवाद