हिजाब पर ना हो हंगामा लागू हो देश के शिक्षण संस्थानो में "एक देश ,एक ड्रेस"

 "विश्व के प्रत्येक मानव कि आजादी कायम रखना प्रत्येक सरकार का जिम्मेवारी है"।


व्यक्ति की इच्छा के अनुसार आपने पोशाक का पहनवा कर सकते हैं लेकिन कुछ ऐसे पोशाक है जो सभी जगहों पर नहीं पहना जा सकता ऐसे जगहों पर इस प्रकार के पोशाक पर प्रतिबंध लगाना उचित होती है।आज भारत देश में हिजाब पर हंगामा हो रहे हैं और देश के कई शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी लोग पोशाक के आधार पर हंगामा खड़ा कर रहे हैं क्या विद्यार्थियों की यह सोच उच्चतम है। इस्लाम धर्म में हिजाब पहनना अनिवार्य है। मोहम्मद पैगंबर ने आपने संदेश में कहा था पहनावे में लज्जा की बात करते थे लेकिन यह कपड़ा आज के समय से बिल्कुल अलग सा है। विश्व के कई देशों में इस्लाम धर्म से संबंधित लोग अलग-अलग प्रकार के पोशाक पहनते हैं।

महिलाओं को परदे में रहना:-

इस्लाम के सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं को परदे में रहना एक अनिवार्यता है और उसे अपने शरीर को पूरे कपड़ों से ढकना उनकी जीवन का अहम हिस्सा है ।महिलाओं को यह सम्मान की ओर ले जाता है लेकिन एक सरकारी स्थल पर सरकारी नियमों में पूरे शरीर को ढककर जाना एक उचित नहीं है ।हर संस्थानों का अपने नियम कानून होते हैं जो उसे पालन करना अनिवार्य होता है यदि विद्यार्थी किसी शिक्षण संस्था में पढ़ते हैं तो उस शिक्षण संस्थान के नियमों ,कानूनों ,घोषणाओं को मानना अनिवार्य होता है। यदि वह नियमों का पालन नहीं करता है तो संस्थान द्वारा उसे निष्कासित कर दिया जाता है।

इस्लाम में शिक्षा सर्वोपरि है:-

इस्लाम धर्म में शिक्षा सबसे सर्वोपरि है ।पैगंबर के समय शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि उसे चीन भी जाना पड़े तो वह यात्रा कर सकते थे। मोहम्मद साहब कथन के अनुसार शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। वर्तमान समय में हिजाब या किसी मुद्दे से कहीं बडा है धार्मिक और सामाजिक।नेताओं की जिम्मेवारी  हो आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा सर्वोपरि हो। ताकि व्यक्तिगत सकारात्मक सोच विकसित हो और एक राष्ट्र के साथ एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके जहां पर हर कोई सुखी संपन्न अपने जीवन व्यक्त कर सकें। मानव का कल्याण उनके हाथों में ही है और उनके व्यक्तिगत विकास  ही  सर्वोपरि और सर्वोत्तम व्यक्ति की पहचान हो सकता है। व्यक्ति मे शिक्षा नहीं है तो वह अपने आप को पहचान ,दुखी  और जीवन को व्यर्थ और आपमान ही महसूस करेगा।

अन्य देशों में हिजाब पर प्रतिबंध:-

विश्व के देशों में हिजाब को प्रतिबंध किया गया है मिश्र देशों में के कई संस्थानों में हिजाब ,नकाब पर प्रतिबंध है और लोगों का समर्थन भी है। सऊदी अरब में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है वहां का राजा मोहम्मद बिन सलमान का कहना है सम्मानजनक पहनावा हो तो महिलाओं को हिजाब या अबाया पहने की जरूरत नहीं है ,अबाया शरीर और हाथ को ढके रहता है यानी पूरे शरीर को ढके रहता है इंडोनेशिया में भी हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था है। सीरिया के विश्वविद्यालयों में चेहरा ढके कर जाना प्रतिबंध किया गया है। कजाकिस्तान में 2017 में हिजाब पर प्रतिबंध किया गया है अजरबैजान में हिजाब को भी प्रतिबंध है किया गया है कुछ ऐसे देश है जिसमें हिजाब पहनना अनिवार्य है जिसमें अफगानिस्तान इराक देशों में हिजाब नकाब और बुर्का जैसे परिधान पहनना अनिवार्य है लेकिन कुछ देशों में समय-समय पर हिजाब का विरोध प्रदर्शन होता रहा है

देश में लागू हो एक ड्रेस:-

भारत देश में हिजाब पहनना अभी तक को विशेष मामला नहीं रहा था। शिक्षण संस्थानों में आज तक इस्लाम संप्रदाय के मुस्लिम महिलाओं या लड़कियां हिजाब पहन कर आए करते थे कर्नाटका में उठे विवाद को लेकर पूरे देश में एक सांप्रदायिक माहौल छिड़ गया है, ऐसी स्थिति में भारत सरकार ,राज्य सरकार, न्यायालय के साथ मिलकर उचित समाधान करनी चाहिए ताकि शिक्षण संस्थानों में धर्मनिरपेक्षता का पालन होता रहे किसी भी संप्रदाय के व्यक्ति अपने विशेष परिधान में संस्थान में प्रवेश ना हो भारत सरकार पूरे देश में यदि "एक राष्ट्र एक परिधान" जैसे नियमों की व्यवस्था करते हैं तो आने वाले समय में कभी भी शिक्षण संस्थानों में धर्म को लेकर विवाद बहस नहीं छिड़ेगा, व्यवस्था सुचारू रूप से चलता रहेगा। जल्द ही इस पर कानून बनाने होगी और "पूरे राष्ट्र के लिए एक ड्रेस लागू करनी होगी चाहे वह विद्यालय सरकार के अधीन हो या निजी संस्थानों के अधीन हो सभी लोग सामान्य ड्रेस अधिनियम का पालन करना होगा।


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 धन्यवाद


KRISHNA KUMAR

Self employed,IAS preparation and State level services prepration.

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