"आरंभ समय से वर्तमान समय तक पशुपालन की प्रक्रिया है"
घुमंतू वे लोग थे जो आरंभ काल में अपने पशुओं को लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करते थे तो इसे घुमंतू पशु चारण कहते हैं।पशुपालन की जानकारी मानव विज्ञान पूरावेशो पर निर्भर है क्योंकि इनकी जानकारी बृहत है और परिणाम के रूप में हमारे पास कम मात्रा में है। मानव समुदाय पशुपालन के लिए घूमना पड़ता था अलग-अलग स्थानों पर पशुओं की खोज में रहता था। भोजन की पूर्ति बने रहे,भोजन की कमी ना हो और कमी होने की स्थिति में पशुओं की मांस का सेवन करके अपनी भोजन को उपलब्ध कर सके।
पशुपालन का उद्देश्य:-
कृषि खाद पदार्थों कमी होने के एवज में पशुओं के मांस से अपनी भोजन की आपूर्ति करना एक उदेश रहा होगा। मानव पशुओं का शिकार पाषाण का उपकरणों तथा औजारों द्वारा करता था।पशुओं को काटना खाल उतारना का काम होता था। मानव पशु भोजन की जानकारी आदमगढ़ की पहाड़ियों, जो नर्मदा घाटी क्षेत्रों से अवशेष मिले हैं। संभवत जंगली घोड़े ,बैल ,हाथी का शिकार करते थे। यही पशु आगे चलकर पालतू हो गए पशु झूडं में रहते तो मानव उनके बच्चों को पकड़ लेता जो धीरे-धीरे पशुपालन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई बाद में भेड़, बकरियों को मानव पालन करने लगे इस प्रकार से देखें तो मानव ने पशुओं के छोटे बच्चों को पकड़कर अपने तरीके से मानव सभाओं के अनुसार डाला और मानव जब चाहे तब उसकी अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रयोग कर सकें
पशुपालन के लाभ:-
पशुपालन लोगों की आजीविका का साधन है। इसके साथ जो खानाबदोश लोग अपने पशुओं को लेकर विनमय का काम करते थे जो आज देखने को मिलती है पशुपालन के माध्यम से अपनी जीवन चलते थे। पशु पालन का प्रयोग कृषि कार्यों में करने लगे पशुओं के सहयोग से खेतों की जुताई करना सरल काम हो गया और बहुत ही आसानी से खेती करना शुरू हो गया। हल को खींचने के लिए पशुओं की आवश्यकता होती हैं और यह पशु पालन के परिणाम है। आज पशुपालन के माध्यम से हम भारी मात्रा में गोबर गैस का निर्माण कर रहे हैं और अपने जीवन में ऊर्जा की मांगों की पूर्ति भी कर रहे हैं और एक सरल और सस्ता इंधन के रूप में हमें प्राप्त हो रही हैं। पशुओं के पालने से हमें कृषि के अलावा अतिरिक्त आय की प्राप्ति होती है यह किसानों को तत्कालीन समय पर आर्थिक सहयोग करता है इस सहयोग से किसान अपने कृषि कार्य और अपने जीवन से संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। पशुओं के गोबर से खेतों की पूर्णता उरवरता बनी रहती हैं और अधिक मात्रा में फसल उगता। एक प्रकार से देखें तो पशुपालन के लाभ हमारे पास अनेक अनेकों अनेक जिसमें मांस के साथ दूध की प्राप्ति और उनके हड्डियों से अमोनिया जो उर्वरक में प्रयोग होती है।
पशुपालन की समस्या:-
पशुपालन की समस्या में सबसे बड़ी चारा की है माना अपने लाभ के लिए जंगलों की कटाई से पशु चारा की समस्या उत्पन्न हो जाती है।भारत में आर्यों का आगमन एक प्रकार से अपने पशु पालन की समस्या को लेकर अपने क्षेत्र से पूर्व दिशा की ओर प्रवेश किया जहां पर अधिक मात्रा में चारा उपलब्ध था। आर्य लोग भारत में आकर बस गए और आर्यों के समय आजीविका का प्रमुख साधन पशु पालन ही रहा। पशुओं के चलते अनेक युद्ध भी हुए पशुओं की संख्या जितनी भी अधिक हो वह व्यक्ति उतने ही अमीर समझा जाता था। पशुपालन समस्या में देखें तो जल की अभाव होती है क्योंकि भोम जल का अंधाधुंध प्रयोग होने से जल की उपलब्धता कमी हो जा रही है। जिसके चलते पशुओं को पानी पीने की समस्या हो जा रही है इसके अलावा मानव गतिविधियों के चलते आसपास के नदी स्रोतों में जल प्रदूषित हो जाने से पशुओं को जल से होने वाले अनेक प्रकार की बीमारियां हो जा रही है। शहरी क्षेत्रों में देखें तो जानवर अधिकांश मिठाइयों के कार्टून प्लास्टिक डब्बा खाते हैं इसके अलावा दवा खाने की खोली, डब्बा ,कचड़े गंदगी और इत्यादि खाने से कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो जाती है जो पशुओं मे अधिकांश मौत के शिकार हो जाते हैं। वर्तमान समय में कृषि क्षेत्रों में अधिक तकनीकी का प्रयोग हो जाने से पशु पालन पर प्रभाव पड़ा है आज पशुपालन का उद्देश्य मांस की आपूर्ति और दूध उत्पादन से है क्योंकि बड़े-बड कृषि यंत्रों का प्रयोग का कार्य में होने लगे हैं और पशुओं की उपयोगिता समाप्त हो रही है शायद आने वाले समय में इनकी उपयोगिता समाप्त हो जाएगी।
पशुओं को पालना:-
पशुपालन में आज अनेक प्रकार के पशुओ को पाला जाता है जिसमें भेड़ पालन, बकरी पालन, घोड़ा पालन इत्यादि पशुओं का पालन किया जाता है। देशों में अधिकांश पशुओं के पालन में गाय और बकरियों का पालन किया जाता है। बकरी गरीब आदमी का गाय कहा जाता है क्योंकि गाय खरीदना बहुत महंगी होती है यदि को गरीब व्यक्ति गाय नहीं खरीद पाता है और वह बकरी रखकर बकरी का दूध सेवन करें तो उसे गाय का दूध समझा जाता है क्योंकि बकरी का दूध बहुत ही प्रोटीन युक्त होती है और बकरी का दूध का प्रयोग डेंगू जैसे घातक बीमारी से लड़ने के लिए उपयोगी होता है क्योंकि बकरी के दूध में प्लेटलेट्स काफी मात्रा में निर्मित होती है जो डेंगू बीमारी को मारने में सहायक होती है। भारत में पशु पालन में देखें तो रोजगार की अच्छी खासी संख्या है। भारत में प्रमुख रूप से भैंसों की नस्ल में मुर्रा नस्ल बेहद प्रसिद्ध है यह अच्छी मात्रा में दूध देती है यह भारत के पंजाब हरियाणा क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है।हमारे देश में भैंसों की नस्ल के लिए ज्यादा खर्च नहीं करनी पड़ती है क्योंकि देश में अच्छे नस्ल है और दूध की प्राप्ति भी ठीक-ठाक से होती है इसके अलावा भारत सरकार द्वारा चलाया गया गोकुलधाम योजना जिसमें देसी गायों की नस्ल को सुधार करके दुधारू पशु के रूप में ढाला जाए क्योंकि हमारे देश का अधिकांश पशुओं देसी प्रकृति कि हैं और एक कम मात्रा में दूध उत्पादन करते हैं यदि हम गोकुलधाम योजना के माध्यम से सुधार करते हैं तो भारत में दूसरी श्वेत क्रांति होगी और दुनिया के सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला देश की श्रेणी में भारत हमेशा रहेगा ।
पशुपालन प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय देखी जाती हैं। पशुओं से मानव की रोजगार प्राप्त होती हैं और आजीविका का साधन है। पशुधन के माध्यम से मानव अपने जीवन मे आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है। आज पशुपालन के रूप में गैर- कृषि है जो कम समय में अच्छी आर्थिक प्रदान करता है। भारत देशों में भारी संख्या में लोग कृषि आजीविका के साथ पशु पालन पर निर्भर हैं। बकरी पालन एक अच्छी पालन है ।शुकर पालन काफी लाभदायक है क्योंकि मांस काफी मात्रा में बिक्री हो जाती है विदेशों में। इस प्रकार से देखें तो पशुपालन आजीविका का एक अच्छी माध्यम है और इसके से हम अच्छी आय भी प्राप्त कर सकते हैं।
धन्यवाद