"मानव जीवन में समय-समय पर क्रांति आया है जिसमें मानव जीवन को बदल कर रख दिया है।"
नवपाषाण काल मैं एक बड़ी परिवर्तन आया जिसमें मानव - प्रकृति संबंधों में एक नई रूप दिया गया। नवपाषाण क्रांति में सबसे बड़ी कृषि के आगमन के साथ मानव जीवन से संबंधित वस्तुओं का प्रयोग में आया जैसे पशुपालन ,आग का आविष्कार पहिए का आविष्कार ऐ सब आ जाने से मानव जीवन का घुमाव एक अलग मोड़ पर ले गया ।कृषि उत्पादन में जौ,चावल ,गेहूं अनाजों का उत्पादन मानव स्वयं करने लगा मानव जंगलों से बीच को चुनकर आपने उपयोग के लिए उसे खेतों में लगाता और अपनी भोजन के लिए उसे अनाज के रूप में प्रयोग करने लगा ।पशुओं को अपने बस में कर के मानव पशुओं को पालतू बनाने लगा जिसके चलते पशुपालन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई पशुओं को पालने से मानव को दूध और मांस की आपूर्ति होने लगी और मानव का जीवन स्थाई होने लगा और वह एक सामाजिक बंधनों के रूप में विकसित होने लगा।
नवपाषाण क्रांति :-
इस काल में मानव जीवन शैली में परिवर्तन हुआ इसमें पाषाण को चिकनी सतह तथा संतुलित गोलाई वाले पर् पाषाण शिल्प को अपनाया। वी गार्डन चाइल्ड ने इस अवस्था को नावपाषाण क्रांति की संज्ञा दी है क्योंकि उपकरण मानव जीवन पर अत्यंत प्रभाव डाला। चाइल्ड का तर्क था की उपकरणों का एक बार उत्पादन आरंभ होने से भूमि को जोड़न आसान हो गया और मानव आपने सभ्यता के विकास में आगे बढ़ता गया और उनके सामने एक विशाल दुनिया जिसमें भौतिक वस्तुओं का समावेश हो गया। मानव औजारों के माध्यम से हाथ से कम बल लगाकर औजारों से अधिक काम करने लगा।
नावपाषाण क्रांति में लोगों का कार्य:-
बीजों का संग्रह:-
औरतें अधिकांश जंगलों में जाकर बीजों व कंदमूल को एकत्रित करना होता था तथा पुरुष आंखेंटक का कार्य करता था। भोजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए जंगली बीजों को चुनकर खेतों में बोया जाने लगा था मानव से आप ने जांच पड़ताल करके अपनी सुविधा अनुसार अनाजों को खेत में बोया ताकि वह भोजन के रूप में प्रयोग हो सके।
औजारों का निर्माण:-
पूर्व के उपकरणों के साथ पाषाण के बने औजार कुल्हाड़ी से पेड़ों को काटना और भूमि को साफ करना आसान हो गया मिट्टी को खोदकर मुलायम बनाया जाने लगा और बीज को आसानी से खेत में बोया जाने लगा। कुल्हाड़ी के शिकार के रूप में भी इस्तेमाल होने लगा जिसमें जानवरों को मारना आसान हो गया ।
पशुपालन करना:-
खेती का विस्तार पशुपालन को बढ़ावा दिया खाली भूमि पर जानवरों का चारा उपलब्ध होने लगा था इन पशुओं में दूध व मांस प्राप्त होने लगा था और आखेटक पर मानव निर्भर कम होने लगा और मानव जीवन में पशुपालन का एक आजीविका के रूप में अपनाया।
नवपाषाण काल की समय अवधि :-
इसकी अवधि 7000 से 3800 वर्ष पूर्व निर्धारित की गई है क्रति शब्द3000 वर्ष तक की एक लंबी अवधि से जुड़ी हुई है। इतिहासकार इरफान हबीब का मत है मानव पाषाण काल की गति को उससे पूर्व की सभ्यता से गति से तुलना कर उसे देखना शामिल है।पहले का मध्यपाषाण काल जो लघुपाषाणिक विशेषता के लिए था इनकी अवधि भारत में 25000 वर्ष की थी जो मनुष्य एक आखेटक तथा चारे की खोज करने वाले के रूप मे दिखाई पड़ता है। 7000 साल पूर्व के लगभग पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा में नाव -पाषाणिक तकनीकों का उद्भव हुआ इन कारणों से क्रांति शब्द का हकदार हो जाता है एक प्रकार से कहें तो नाव पाषाण की अवधि एक लंबी अवधि है जिसमें आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिलता है।
नवपाषाण काल की विशेषताता:-
इसमें पेड़ पौधे तथा पशुपालन ने एक आत्मनिर्भर भोज्य सामग्री उत्पादक अर्थव्यवस्था का ढांचा तैयार करने की पहल की।अनाज उत्पादन से भोजन की आपूर्ति हुई तथा पशुपालन करने से मानव का कार्य पशुओं को पालन में लगा। पशुपालन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी थी उनका जीवन एक असाधारण परिवर्तन आरंभ हुआ। भोजन की खोज से उनकी पर्यावरण पर पूर्ण रूप से निर्भर समाप्त हो गई और वह अपने लिए भोजन का उत्पादन खेती करके करने लगा ।खेती के रूप में पाषाण के बने औजारों का प्रयोग करके बीजों को वह आसानी से उगाने लगा। पूर्व में मानव को भोजन के लिए समय-समय पर अपने निवास में परिवर्तन करते रहना पड़ता था लेकिन अब मानव जीवन खेती करने, पशुपालन और फसल उत्पादन से उनका जीवन स्थाई हो गया और वह एक जगह बस कर जीवन बिताने लगा इस प्रकार से देखें मानव कृषि करना एवं पशुपालन करना सीखा।
नावपाषाण क्रांति के दौरान मानव जीवन में परिवर्तन का दौर रहा। कृषि कार्य प्रारंभ हुआ इनके साथ-साथ पहिए का खोज भी यातायात में एक नई क्रांति आया अब वस्तुओं और मानव को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पहिया उनके पास हो गया आसानी से वह एक जगह से दूसरी जगह जा सकता था। पाहिये का आविष्कार से मानव जीवन को ही बदल डाला। आग से वह भोजन को पका कर खाने लगा। पाषाण की कुल्हाड़ी तैयार होने से शिकार करना आरंभ हो गया और बहुत ही आसान तरीके से शिकार करना सुचारू रूप से संपन्न होने लगा। मानव जंगलों के बीजों को चुनकर खेतों में लगाने लगा उसके द्वारा भोजन की आपूर्ति किसी भी समय होने लगा। नावपाषाण की अवधि में मानव जीवन की दिनचर्या बदल कर रह गई जो आज विकास के दौर में देखने को मिलती है आज जितनी बड़ी सभ्यता विकसित हुई है वह कहीं न कहीं मानव जीवन में परिवर्तन का दौर रहा है। एक बड़ी परिवर्तन नवपाषाण काल मे हुई आज की बात करें तो आज हमारे पास तकनीकी का एक बड़ा परिवर्तन हुआ है तकनीक के माध्यम से मानव आज बैठे-बैठे लंबी दूरी की बातें यात्राएं साझा ,विचार क्षण समयो में कर लेते हैं।
धन्यवाद