" एक देश का विकास मजबूत "आर्थिक नीतियों "के चलते ही संभव है।"
भारत की स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को ईस्वी में हुई इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि भारत देश की अर्थव्यवस्था के विकास का माध्यम क्या होगा। भारत पूंजीवाद होगा, समाजवाद होगा, साम्यवादी होगा या मिश्रित वादी अर्थव्यवस्था होगा इन तमाम मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया लेकिन शुरुआती के दौर से ही देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू समाजवादी विचारधारा के थे इन्होंने भारत में समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपनाया गया जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को मजबूत करना था और भारत को एक आर्थिक विकास राष्ट्र के मार्ग पर खड़ा करना था। समाजवादी अर्थव्यवस्था में समाज के सभी व्यक्तियों के कल्याण निहित था इसमें सरकार देश के संसाधनों का उचित इस्तेमाल करके लोगों तक पहुंचाने का कार्य करती है जिसमें लोगों का कल्याण निहित हो और संसाधनों पर सरकार का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की संपत्ति हो जिसमें देश के प्रति लोगों का उस संपत्ति पर अधिकार हो। भारत सोवियत संघ है की अर्थव्यवस्था का अनुसरण करते हुए देश में समाजवाद अर्थव्यवस्था को उचित समझा और नेहरू की विचारधारा के अनुसार अपने अनुसार से भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया इसलिए भारत की अर्थव्यवस्था को "नेहरूवियम अर्थव्यवस्था" भी कहा जाता है यानी कि "नेहरू की अर्थव्यवस्था" कहा जाता है।
भारत की समाजवादी अर्थव्यवस्था:-
भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए "पूर्व सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था" का अनुसरण किया और योजना के माध्यम से भारत को विकास करने की संकल्प लिया भारत में भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 5 वर्ष का योजना लागू किया गया जिसे "पंचवर्षीय योजना" कहा गया है।यह शब्द सोवियत संघ से लिया गया है जिसमें 20साल का अर्थव्यवस्था का मानचित्र और विकास को प्रस्तुत करता है लेकिन भारत में यह 5 वर्ष का आलेख तैयार करता है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में 15 मार्च 1950 ईस्वी में योजना आयोग की स्थापना किया गया तथा देश के पहले औद्योगिक नीति 1948 के तहत इसकी स्थापना का श्रेय दिया जाता है। भारत के विकास के लिए नीति जारी कर दिया गया था लेकिन भारत का एक समुचित और सही ढंग से विकास नहीं हो पा रहा था इसलिए भारत सरकार ने योजना आयोग की स्थापना 1950 के तहत किया गया और इसे एक "थिंक टैंक" के रूप में भारत की विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेवारी योजना आयोग की अध्यक्ष प्रधानमंत्री और उनके उपाध्यक्ष तथा राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सदस्य इसमें शामिल रहती है लेकिन भारत सरकार 13 अगस्त 2014 में योजना आयोग को समाप्त कर दिया और इसके जगह पर 1 जनवरी 2015 को नीति योजना आयोग को कि स्थापना । भारत पंचवर्षीय योजना के माध्यम से भारत स्मृद्धि अर्थव्यवस्था गतिशीलता अर्थव्यवस्था परिवहन व्यवस्था भारत की विकास आत्मनिर्भरता सकल घरेलू उत्पाद इत्यादि पर बृहत रूप से जोर दिया।।
सकल घरेलू उत्पाद किसे कहा जाता है :-
देश में 1 वर्ष की अवधि के दौरान सभी वस्तुओं का उत्पादन और इनकी सेवाओं का बाजार मूल्य है जीडीपी कहलाता है एक देश की वृद्धि की माप जीडीपी नामक यंत्र है कि कोई भी देश कितनी गति से आगे बढ़ रही है यानी भारत की जीडीपी आगे बढ़ रही है तो भारत विकसित राष्ट्र के मार्ग पर खड़ा होगा यदि भारत में उत्पादन सेवाएं और मूल्य की कमी हो रही है तो भारत की जीडीपी घट रही है जैसे कि एक छोटा सा केक उत्पाद हमारा देश में होता है तो इसका उपभोग यानी की इस्तेमाल छोटे स्तर तक ही होगा और इसका व्यापक रूप से जीडीपी में सहयोग नहीं होगा। वही बड़े केक का निर्माण होता है तो इसका उपयोग अनेक लोग कर सकते हैं और इनकी भागीदारी जीडीपी में अधिक हो सकती है यानी बृहद पैमाने पर उत्पादन होगा उतना ही बड़े पैमाने पर भारत की प्रगति होगी जीडीपी की प्रगति होगी तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है उत्पादन कम हो गए हैं कमजोर हो गए हैं तो देश का विकास कम हो गया है इसके माध्यम से भारत में सभी नई वस्तुओं को शामिल किया जाता है उनका उत्पादन उसका सेवाएं और उसका बाजार मूल्य को जोड़कर हम जीडीपी प्राप्त करते हैं। जीडीपी को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से योगदान किया जाता है कृषि क्षेत्र, द्वितीय क्षेत्र और तृतीय क्षेत्र के यानी कि औद्योगिक क्षेत्र ,सेवा क्षेत्र एवं अन्य बौद्धिक संपदा क्षेत्र से भी देश को विकसित किया जाता है । भारत में सबसे अधिक जीडीपी में हिस्सेदारी सेवा वर्ग है। सेवा वर्ग वह होता है जिसमें सिर्फ सेवा देने के कार्य किया जाता है और सेवा के बदले में सेवा कर वसूला जाता है जैसे कि परिवहन प्रणाली, बैंक प्रणाली ,शिक्षा प्रणाली ,डाक प्रणाली इत्यादि सेवा क्षेत्र में आते हैं जिसमें सरकार को सबसे अधिक मात्रा में आय की प्राप्ति होती है।
अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना:-
पंचवर्षीय योजना में लक्ष्य को शामिल रखा गया जिसमें भारत आत्मनिर्भर हो लेकिन आपको मालूम है कि दुनिया की कोई भी देश है अपने आप में आत्मनिर्भरता नहीं है। उत्पादन और सेवाओं के लिए हर प्रकार के उत्पादक अपने देश में नहीं कर सकता है यानी कि हर देश किसी न किसी देश पर निर्भर है। हालांकि हम किसी देश पर निर्भर हो जाते हैं तो हमारा निर्यात घट जाती है सिर्फ आयात बच जाती है और अधिक आयात करने से हमें अधिक मात्रा में खर्च करनी पड़ती है और हमारे आर्थिक खर्चे की शक्ति कमजोर हो जाती है यदि कोई देश अधिक मात्रा बेच रहा है अधिक मात्रा में मजबूत होगा क्योंकि निर्यात करने से उसकी समान दुनिया के अन्य देशों में भी दिखेगा सीधा। भारत में जितना संभव हो सके उत्पादन के रूप में इस्तेमाल करें ताकि हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे और कम से कम हम विदेशी वस्तुओं को खरीद कर सकें अपने ही देश की वस्तुओं का अधिक उत्पादन अधिक करेंगे तो हम अपने देश में इस्तेमाल करने के साथ-साथ विदेशों में इसका निर्यात कर सकते हैं। निर्यात करने में डॉलर के रूप में मुद्रा प्राप्त होगी और हमारी अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत होगी देश के पहले प्रधानमंत्री ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्प किया काफी हद तक क्रांति के माध्यम से के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर किया गया।
पंचवर्षीय योजना क्या थी:-
इसमें 5 साल की अवधि होती थी। 5 साल की अवधि में अर्थव्यवस्था का विकास करने के लिए तय किया जाता था ताकि हम फैसला लिया गया उसे पूरा कर सकें और एक समय अवधि के दौरान उसे हम पूरा कर सकें इसलिए पंचवर्षीय योजना को फाइव ईयर प्लान भी कहा जाता है इनकी स्थापना का श्रेय भारतीय महान अर्थशास्त्री महालनोबोलिस को दिया जाता है। इन्हीं की प्रेरणा से भारत में योजना आयोग की आगाज हुई और पहले योजना आयोग 1951-1956 में शुरुआत हुई अंतिम 12वीं पंचवर्षीय योजना 2017 तक कायम रहा इसके बाद एनडीए सरकार ने एक नई आर्थिक योजना पेश किया जिसका नाम नीति आयोग रखा गया इस प्रकार से हम देखें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में एक लंबी अध्याय योजना आयोग को समाप्त करके एक नए अध्याय को शुरू किया गया जिसका नाम नीति आयोग नेशनल इंस्टिट्यूटशन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया। यानी भारत का बढ़ता प्रगतिशील कि स्थापना हुई और इसकी स्थापना किया गया। भारतीय पंचवर्षीय योजना में देश की विकास के लिए बड़े-बड़े औद्योगिक संस्थान को आधारभूत संरचना को विकसित किया गया और भारत दुनिया के सामने विकसित रूप में आया जो आज भारतीय अर्थव्यवस्था भी एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में गिनी जाती है।
नीति आयोग की सूत्रपात क्यों हुआ:-
भारत में एक लंबे कांग्रेस की सरकार के बाद 2014 में एक नई एनडीए की सरकार कायम हुआ जिसमें आपने अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की कल्पना प्रस्तुत किया जिसमें योजना आयोग को समाप्त करके 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में किया गया और यहीं से भारत की अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए दूसरे अध्याय की शुरूआत मानी जाती है। नीति आयोग की स्थापना भारत के 14 वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया और इस आयोग का अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होता है और इनके उपाध्यक्ष भी होता है इसके अलावा भारतीय संघ के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसका सदस्य भी होता है और पदेन सदस्य भी होता है। नीति आयोग में एक लंबी अवधि 15 साल का टारगेट है जिसमें 3 साल का एक्शन प्लान है 3 साल के एक्शन प्लान में हमें भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित करना है और को पूरा करना है ताकि हम किसी भी योजना को लंबे समय तक टाल नहीं सकते हैं क्योंकि लंबी अवधि लेने के बाद क्या होती है कि योजना अधूरा या सरकार बदल जाने से पूरा नहीं हो पाता है। हमें देखना है कि भारतीय विकास के लिए नीति आयोग की भूमिका कितनी होती है यह हम सभी के लिए इंतजार रहेगा हमें कई प्रकार के सावधानियां और नियमों से चलनी पड़ती है तभी हम एक अच्छे मुकाम पर पहुंच पायेंगे।
भारत में पंचवर्षीय योजना की शुरुआत भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बनने का प्रबल कदम था। इसमें हम कई मायने में आगे बढ़े और बढ़ते रहें। नीति आयोग की स्थापना भी भारतीय सतत विकास के लिए दूसरी अध्याय हैं इसे कई सारे काम अभी काम करने बाकी है। पंचवर्षीय योजना के माध्यम से हम कुल 12 पंचवर्षीय प्लान चलाएं यानी कि भारत की विकास के लिए 60 सालों का एक रोडमैप आर्थिक विकास को अग्रसर किया और कई सारे मुकाम भी हासिल किए लेकिन अब देखना है कि नीति आयोग किस प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है और लक्ष्य के रूप में क्या-क्या प्राप्त करती है क्योंकि सभी को पता है वर्तमान समय में दुनिया के लगभग सभी अर्थव्यवस्था तमाम समस्याओं से गुजर रही है जिसमें की कोविड-19 का कार्यकाल हो यह विश्व में युद्ध का मंडराना हो जीडीपी का उत्पादन दर घटना हो ,इसके अलावा रोजगार की बड़ी व्यापक कमी हुई है। विश्व में और भारत के देशों में भी इन तमाम चुनौतियों को भारत सरकार किस प्रकार से नियंत्रित करती है और सभी को समेट के किस प्रकार से नीति आयोग की अहम भूमिका होती हैं।
जय हिंद
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