"दाने- दाने पर लिखा है, खाने वाले का नाम"।
दुनिया में हरित क्रांति के जन्मदाता डॉक्टर नॉर्मन ब्लॉग को माना जाता है जबकि भारत में इस क्रांति के जन्मदाता एस. के. स्वामीनाथन को कहा जाता है भारत में अनाज उत्पादन के लिए लाया गया पहला हरित क्रांति भारत के उत्तर पश्चिमी राज्यों में मुख्य रूप से पंजाब ,हरियाणा के क्षेत्रों तक सीमित रखा गया। वह यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के लिए काफी अनुकूल था इन क्षेत्रों में जरूर मिट्टी की प्रधानता के चलते उपजाऊ भी अधिक थी यही वजह है कि भारत में पहले हरित क्रांति की आगाज उत्तर-पश्चिमी राज्यों में किया गया।हरित क्रांति भारत में 1960 के दशक में लाया गया और इनकी शुरुआत 1967-68 में किया गया इस समय देश के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी लेकिन हरित क्रांति की शुरुआत की श्री गणेश लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हो चुका था आजादी के समय भारत में कुल जनसंख्या का 75% लोग कृषि कार्य में लगे हुए थे और एक बड़ी अर्थव्यवस्था कृषि अर्थव्यवस्था पर निर्भर थी। अचानक भारत में 1965-66 में भयंकर अकाल के चलते लाखों लोगों की मौत हो गई जिसके चलते भारत सरकार ने हरित क्रांति की रास्ता साफ किया और एक नई क्रांति की शुरुआत की जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में विशेषकर गेहूं और चावल अनाज के उत्पादन में बढ़ोतरी करना था।
हरित क्रांति अपनाने का कारण:-
भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है यहां पर अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्य से लगी हुई थी। आजादी के समय अंग्रेजों ने कृषि की हालत काफी खराब कर रखी थी। हमारे देश में अनाज उत्पादन करने के लिए हमारे पास नवीन तकनीक नहीं थी ना ही उत्तम किस्म के बिजी थे ना ही उत्तम प्रकार की सिंचाई व्यवस्था थी और उन्हें 1965 में भारी अकाल के चलते भारत में हरित क्रांति की शुरुआत करने का मुख्य वजह माना गया है और अमेरिका द्वारा पीएल 480 समझौते का उल्लंघन करने के चलते और इन्हें भारत को अनाज उपलब्ध कराने की एवज में भारत खुद अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़ी कदम उठाया है जो हरित क्रांति का लाया और आगे जाकर भारत में गेहूं और चावल की फसलें अधिक मात्रा में उत्पादन हुई।
पीएल 480 समझौता क्या था:-
यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच में हुई थी जिसमें 4 वर्षों का समझौता था जिसमें यह कहा गया था कि यदि भारत में अनाज संकट उत्पन्न होती है तो इस समय अमेरिका भारत को मदद करेगा और इसे फूड फॉर पीस के नाम से भी जाना गया क्योंकि भूख में व्यक्ति अनाज ही प्रयोग करेगा लेकिन दु:ख की बात यह है कि यह समझौता भारत के पक्ष में नहीं रहा क्योंकि इसके पहले भारत और चीन के बीच 1962 का युद्ध हो चुका था और 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हो चलने के चलते अमेरिका इस समझौते को रद्द किया जो मानव दृष्टि से ठीक नहीं था । हमें अमेरिका अनाज के रूप में मकई की आपूर्ति किया था जो उस देश में मकई का कोई महत्व नहीं था और यह भारत के लिए भेजा इन वजहों से हम भारत अनाज उत्पादन के लिए स्वयं के कदम बढ़ाया और एक बड़ी क्रांति किया दूसरों पर निर्भर ना होकर खुद पर निर्भर रखकर भारत एक बड़ी कार्य किया।
हरित क्रांति के चरण:-
हरित क्रांति में मुख्यता दो चरण को अपनाया गया जिसमें से तक अपनाया गया जबकि वहीं पर दूसरी अस्तर 1970 के मध्य दशक से लेकर 1980 के मध्य सकता अपनाया गया इन 20 वर्षों में भारत में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न उत्पादन हुआ और भारत 1960 दशक के अंत तक खदान उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया आत्मनिर्भर का सीधा अर्थ है कि जितना संभव हो जितना हो सके उत्पादन देश के अंदर ही किया जाए।
हरित क्रांति में अपनाया गया अन्य तरीके:-
हरित क्रांति में अनाज उत्पादन करने के लिए HYV बीज का इस्तेमाल किया गया। यह उन्नत किस्म का बीज था जो अधिक पैदावार दे सकता था लेकिन इनकी उत्पादन करने के लिए हमें अधिक मात्रा में जल स्तर जल का प्रयोग करना था सिंचाई के लिए हमें बड़े-बड़े बोरवेल करना पड़ा और हमें सिंचाई में इसका प्रयोग करना पड़ा साथ में ही कीटनाशक उर्वरकों और अन्य रसायनों का प्रयोग किया गया इन सभी का प्रयोग एक आधुनिक तरीके से किया गया। साथ ही खेती में बीज लगाने काटने और समेटने के लिए बड़े मशीनों का प्रयोग किया गया जिसके चलते भारत में हरित क्रांति की आगाज में एक नई प्रकार की चरण का प्रवेश हुआ। हरित क्रांति में विशेषकर बड़े किसानों ने इसका लाभ लिया क्योंकि छोटे किसानों को पास पूंजी का अभाव था और वह बड़े तकनीक खरीद नहीं सकते थे ना ही उर्वरक ह सकते थे इसलिए अक्सर आलोचना की जाती है कि हरित क्रांति मुख्यता बड़े किसानों को ही लाया गया लेकिन ऐसा नहीं है बाद में भारत सरकार ने किसानों को सब्सिडी अनुदान दिया जिसके चलते छोटे किसान भी बड़े किसान के बराबरी हो गए।
हरित क्रांति का क्या लाभ हुआ:-
कांति आने से भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया इसमें बड़े किसानों को लाभ हुआ और अनाज उत्पादन अधिक मात्रा में हुआ और किसान इस अनाज का वितरण किया जिसमें उसका व्यापार अधिशेष हुआ और किसानों की आय दोगुनी होने का कार्य किया गया आज भी उत्तरी पश्चिमी भारतीय किसान काफी अमीर है। भारत देश के अन्य किसानों की तुलना में जबकि वहीं पर छोटे किसानों की लाभ कम हुआ क्योंकि छोटे किसान बड़े किसान पर निर्भर हो गए बड़े किसान तकनीक रखे हुए थे जैसे कि मान लिया जाए छोटे किसान को सिंचाई करनी है तो बड़े किसान का सिंचाई हो जाने के बाद ही छोटे किसान को सिंचाई करने दिया जाएगा। वह भी एक निश्चित आय पर अनाज उत्पादन हो जाने से भारत सरकार की अनाजों का भंडारण बफर स्टॉक के रूप में किया जो किसी भी समय भारत में खाद्यान्न की कमी होती है तो इसके माध्यम से लोगों तक खाद्यान्न को पहुंचाया जाएगा जिसमें भारत में खदान भंडारण की कितनी बड़ी महत्व है कोरोनावायरस के लोगों दुनिया के लोगों के पास अनाज भेजने का काम भारत सरकार ने किया।
हरित क्रांति से क्या नुकसान क्या हुआ:-
कांति आने से जहां लाभ हुआ वहां पर ही कई प्रकार से हानियां भी देखने को मिलती है कहा जाता है कि भारतीय किसान ईश्वर के भरोसे बैठे रहते हैं और उन्हें अन्य किसी प्रकार से बातें नहीं पता चलते हैं वह काफी भोले भाले और सीधे साधे भारतीय किसान होते हैं हरित कांति आने से अधिक मात्रा में उर्वरक मिला देने से किसानों की जमीन अनुउर्वर हो गई यानी कि उनकी मिट्टी से लवण की ओर बढ़ गई और कृषि उत्पादन क्षमता कमी होने लगी इसके साथ ही अधिक मात्रा में जल सिंचाई करने से भूमि का जल स्तर कम हो गया जो आज भारत के उत्तरी पश्चिमी प्रदेशों में भूमि जल स्तर की कमी देखी जाती है इसकी वजह कहीं ना कहीं हरित क्रांति की ही रही है अधिक मात्रा में उर्वरक प्रयोग करने से आसपास के जलाशयों में जल प्रदूषण देखने को मिला और जलीय जीवो पर संकट उत्पन्न हुआ इसके साथ ही छोटे-मोटे जानवर जैसे खरगोश, बकरी ,चूहे इत्यादि भी उसकी पारितंत्र प्रणाली पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा ,छोटे-छोटे जीव जंतु ऐसे ही रसायन के प्रयोग करने से मर गए और कीटनाशकों के प्रयोग करने से वायुमंडल में घुल मिल जाने से लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा क्योंकि कीटनाशक में भारी मात्रा में अन्य दवाओं का मिश्रण होती है और छोटे किसान की इसमें अधिक लाभ नहीं मिल पाया कि छोटे किसान अक्सर गरीब थे कहा जाता है कि भारत के अधिकांश किसान मजदूर और काफी गरीब है इन लोगों को भी हरित क्रांति में कोई लाभ देखने को नहीं मिला अक्सर बड़े किसान को ही इसमें अधिकांश रूप में लाभ हुआ।
हरित क्रांति आने से भारत में एक नई पहचान मिली और भारत फसल उत्पादन के लिए क्षेत्र में ही बड़े-बड़े क्रांतियां किया जो आज हम अनाज उत्पादन हो ,सब्जी उत्पादन हो, फल उत्पादन हो, अन्य उत्पादन हो आज भारत कहीं ना कहीं दुनिया के सबसे प्रमुख देशों में से खड़ा है। हरित क्रांति आने से भारतीय किसानों में एक नई प्रकार की ऊर्जा उत्साह हुआ। भारतीय देशी बीजों के जगह पर देशी बीजों का प्रयोग हुआ लेकिन हमें देशी बीजों की जो खासियत परंपरा थी उसे हमें खोना पड़ा। आज भारतीय किसानों को खेती करने के लिए पूरी तरह से बड़ी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर निर्भर हो गया है। यानी हमारे देशी बीज भी काम नहीं करते हैं और उत्पादन कम हो पाता है इसे हमें बचाना चाहिए लेकिन आज के समय में हमें अधिक मात्रा में जैविक कृषि को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि हरित क्रांति अपनाया गया यह कृषि पर्यावरण के अनुकूल नहीं है बल्कि यह प्रतिकूल है के अनुकूल खेती की जाती है जैविक कृषि प्रकृति के अनुकूल मानी गई है और मानव के लिए स्वास्थ्यवर्धक के रूप में अधिक भी देखा गया है।
जय हिंद
आलेख अच्छे लगे तो कृपया करके दूसरे तक पहुंचा दे "ज्ञान प्राप्ति ही ज्ञान मुक्ति है" ।
धन्यवाद
Very useful for me
जवाब देंहटाएं