" तकलीफ़ भी सहने की सीमा होती है"
महात्मा गांधी की दुसरी सविनय अवज्ञा आंदोलन/नमक आंदोलन यानी दांडी यात्रा था। यह आंदोलन 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियों यानी कि पुरुष सत्य ग्राहक के साथ प्रारंभ हुआ जिसमें 240 मील की यात्रा 24 दिन लगभग 4 सप्ताह की यात्रा रहा 6 अप्रैल 1930 को डांडी पहुंचकर महात्मा गांधी ने चुटकी भर नमक एवं समुद्री जल को उबालकर अंग्रेज की नमक कानून को तोड़ने का कार्य किया।
आंदोलन की तैयारियां :-
गांधीजी ने प्रत्येक गरीबों को एक साथ संबंध स्थापित किया और एक साथ मजबूत एकता के रूप में बांधने की कार्य किया। गांधीजी गरीबों को अहिंसा तरीके से आंदोलन में लाया व जनता की व्यापक भागीदारी लिया और किसी भी हालत में हिंसा के रास्ता नहीं अपनाना। गांधीजी अहिंसा को हथियार बनाया और आंदोलन को छेड़ दिया जिसमें गांधी के साथ भारत के सभी वर्गों ने इस आंदोलन को सहयोग किया क्योंकि नमक एक आम जन की वस्तुएं हैं और से प्रत्येक लोगों की आवश्यकता पड़ती है।
आंदोलन के क्या कारण थे:-
नमक आंदोलन की सबसे बड़ी वजह नमक कर थी क्योंकि नमक पर की सरकार अधिक कर में बढ़ा दिया गया था। नमक आम लोगों के जीवन में रोजमर्रा की आवश्यकता की वस्तु थी। 2 मार्च 1930 को गांधी लॉर्ड इरविन को 11 सूत्री की दस्तावेज सौंपा जिसमें से भू राजस्व की कमी, सेना खर्च में कटौती , विदेशी वस्तुओं प्रतिबंध, नमक कर में कमी इन सभी मांगे ना पूरी होने के चलते आंदोलन सबसे गरीब की ही होगी गांधी जी ने लॉर्ड इरविन को कहा और गरीब लोग शामिल होंगे और गरीबों की सबसे बड़ी आंदोलन होगी इस आंदोलन की मुख्य वजह नमक ही था इसलिए इस आंदोलन का नाम नमक आंदोलन या गरीबों का आंदोलन भी कहा गया।
गांधी जी की दांडी यात्रा का विवरण:-
दुनिया भर के समाचार पत्रों के माध्यम से अपना बयान गांधी जी देश दुनिया तक पहुंचा दी है। अहिंसा की कड़ाई से पालन किया गया । शुरुआती में आपने आश्रम के लोग ही चुने क्योंकि यह लोग अनुशासन सत्याग्रह तथा अहिंसा के प्रति निष्ठावान रहे हैं 24 दिन की यात्रा चार जिलों 78 गांव से गुजरा रास्ते में गांधी जी भाषण की योजना बनाते जहां भी लोग मिलते वहां पर भाषण देते । पहले दिन 21 किलोमीटर चले और 4000 की भीड़ को संबोधन किया और गरीबों की लड़ाई बताते थे रास्ते में नए-नए स्वयं सेवकों की भर्ती किया जाता था। नमक आंदोलन में लोगो शामिल होना जरूरी था क्योंकि बापू दबे कुचले ,वंचित, शोषित व गरीबों को आंदोलन में शामिल किया।
गांधी जी के भाषण:-
महात्मा गांधी रास्ते में साक्षात्कार देते, लेख लिखते ,निबंध लिखते पत्रकारों इस भाषण को यूरोप और अमेरिका के घर-घर तक पहुंचा दिया।मार्च के अंत में गांधीजी की घोषणा की कि या सत्ता के विरुद्ध की लड़ाई में मुझे समझ दुनिया की सहानुभूति चाहिए । 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने मिट्टी की ढोंखा लिया और समुद्र जल को उबालकर नमक बनाया गाने आह्वान किया जहां भी हो आप की सुविधा अनुसार नमक बनाएं ।
दांडी यात्रा का प्रभाव :-
यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग लोगों द्वारा नेतृत्व किया गया और मोर्चा को संभाला गया। सी० राजगोपालाचारी तिरुचिरापल्ली में से वेदारण्यम ( तंजौर) तक नमक यात्रा की कमान संभाला। ब्रिटिश सरकार गांधी को गिरफ्तार कर लिया जिसके चलते व्यापक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। 21 मई को 2000 स्वयंसेवकों सरोजिनी नायडू और मणिपाल गांधी जी के पुत्र की अगवाई में धरसाना नामक कारखाना पर कब्जा कर लिया गया। मुंबई वडाला नामक, कारखाना पर 15000 की भीड़ ने कब्जा कर लिया सनिकट्टा नामक कारखाना जो कनार्टक में है 10000 की भीड़ ने अपने अधीन कर लिया तथा तटीय क्षेत्रों में नमक कानून की धज्जियां उड़ा दे गई चारों और नमक बनाए जा रहे थे। 11 सूत्री मांग को प्रथम गोलमेज सम्मेलन में अपना लिया गया जिसमें गांधी "इरविन समझौता" भी कहा गया हिंसक कार्यों में शामिल लोगों को छोड़ दिया गया ।
दांडी यात्रा यही नमक आंदोलन गांधी जी की दूसरी सबसे बड़ी आंदोलन का हिस्सा रहा। भारत के सभी लोगों ने इसका सहयोग किया ।खासकर इस आंदोलन में समाज के कमजोर वर्ग मजदूर वर्ग समाज के हास्य शोषित वर्गों ने पूरे जोर-शोर से नमक आंदोलन का समर्थन किया क्योंकि ब्रिटिश सरकार का नमक पर कर दिया गया था। दांडी यात्रा की समाप्ति और भारत में अच्छे शासन के लिए लंदन में तीन गोल में सम्मेलन को बुलाया गया जिसमें से उन्हें जो 1931 में गांधी-इरविन समझौता संपन्न हुआ सभी हिंसक कार्य लोगों को छोड़ दिया गया लेकिन भगत सिंह को नहीं छोड़ा गय। गांधी जी आपने भावना के माध्यम से देश दुनिया में फैलाया लोग भी आपने हिम्मत दिखाकर अंग्रेजी शासन की खिलाफ हो गए।
सही मायने में नमक आंदोलन एक गरीब आंदोलन था। समाज के सभी लोगों ने सहयोग किया और यह एक प्रकार से भारतीय जनमानस के बीच राष्ट्रवाद और देश प्रेम और राष्ट्र की स्वतंत्रता की लालसा उत्पन्न किया ।
आर्टिकल अच्छे लगे तो दोस्तों जरूर शेयर करें
नीचे जाकर मुझे फॉलो कर सकते हैं
ज्ञान की प्राप्ति से ही ,मुक्ति प्राप्त होती है
धन्यवाद