"गांधीजी की राजनीतिक दर्शन सत्य और अहिंसा पर आधारित था"।
महात्मा गांधी की राजनीतिक दर्शन अहिंसावादी है। इन्होंने विश्व प्रसिद्ध पुस्तक "हिंद स्वराज" लिखा यह मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया था लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसे उन्हें सुनो में ही प्रतिबंधित कर दिया और बाजार में बिकने के लिए सख्त पाबंदी लगा दिया 1910 में हिंद स्वराज को जोहान्सबर्ग में अंग्रेजी अनुवाद में प्रकाशित किया गया।
गांधीजी के अनुसार स्वराज का अर्थ-
इन्होंने कहा अहिंसक तरीके से सत्याग्रह तरीके से और आध्यात्मिक का महत्व करते हुए सहनशील प्रतिरोध के रूप में राजनीतिक आंदोलन को एक विशाल और विस्फोटक हथियार के रूप में प्रयोग किया और इसे भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति करने में अहम भूमिका और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
हिंद स्वराज का दर्शन:-
इस ग्रंथ में प्रेम भावना की शिक्षा उपस्थित है। ग्रंथ में हिंसा के बदले आत्मबल को प्रतिस्थापित किया गया है। भौतिक लाभों के चलते समाज में असमानता और गरीबी बढ़ी है जिसके चलते समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी मूल संसाधनों से वंचित है और समाज में खाई के रूप में दिखाई पड़ती है।
हिंद स्वराज ग्रंथों में निम्न बातों पर चर्चा किया गया है जो इस प्रकार से है-
सहनशीलता प्रतिरोध:-
अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए हथियारों के विपरीत अहिंसा तरीके से आंदोलन करना कुछ करने से पहले चेतना को जगाना और हथियार के प्रतिकूल में आत्मबल को प्रयोग देना इसमें आत्मिक शक्ति का प्रयोग हो। गांधी जी ने कहा यदि में आत्मिक शक्ति का पालन नहीं कर पाता हूं तो दंड को स्वीकार करता हूं तो मैं अपनी शक्ति का प्रयोग करता हूं इसमें स्वयं की त्याग शामिल होती है।
गांधीजी की अहिंसा का विचार:-
इसका मूल अर्थ है कि गांधीजी बिना हिंसा किए हुए अपने जीत हासिल करना वास्तविक अर्थ है आत्मापीड़ा जब तक हम अपने आप को अहिंसा का पालन करना है इसका मतलब यह नहीं है कि दुर्जन के सामने समर्पण करना बल्कि दुर्जन के सामने संपूर्ण अहिंसा तरीके के बल के साथ खड़ा होना ताकि अन्याय सरकार के सामने संपूर्ण शक्ति की चुनौती दे सके अथवा हुआ कि सरकार यदि अहिंसा पर उतरती हैं तो इसके विपरीत में हमें अहिंसा का तरीका पालन करते हुए सरकार के सामने खड़ा रहना है।
गांधीजी की राजनीतिक दर्शन दो बातों से प्रभावित है:-
गांधीजी की लालन-पलन अपने ही परंपरा के अनुसार हुई थी। इन्होंने भारत की आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपने आप को समर्पित किया। गांधी की विचार तीन प्रमुख संकल्पों पर आधारित है जिसमें सत्य अहिंसा और सत्याग्रह की व्याख्या की है। गांधीजी हिंदुत्व ,जैनागम, बोधगम, भक्ति आंदोलन हेतु उद्धृत किया है । गांधी इन चीजों को बचपन में ही तथा युवावस्था में ग्रहण कर लिया कुछ विद्वानों का विचार है है कि यह सब विचार हिंद स्वराज में शामिल किया गया है।
* महात्मा गांधी ने टॉलस्तोय की पुस्तक "किंगडम ऑफ गॉड इज विदीन यू" अधिक प्रभावित किया है गांधीजी लिखते हैं कि जब इस ग्रंथ को पढ़ा तो मेरी विचारधारा ही बदल गई इसके पहले में हिंसा में विश्वास करते थे बल्कि अध्ययन के बाद मै अहिंसा पर विश्वास करने लगा और इसी प्रकार किया।
*1904 ने महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में लंबी ट्रेन यात्रा के दौरान "अनटू दिस लास्ट" नामक कहानी पड़ा उसका स्वभाव और ही बदल गया और पहले आश्रम "दी फिनिक्स सेटेलमेंट" जो डरबन में स्थापित किया यह अफ्रीका देश में स्थित है।
*हेनरी डेविड की पुस्तक थोरो में "एसे ऑन द ड्यूटी ऑफ सिविल डिसऑबेडिएंस" का जिक्र किया गया है जिसमें महात्मा गांधी ने यह किताब जब पढ़ तथा इस किताब में सरकार की गलत नीतियों की निंदा किया गया है। गांधी जी को इस सिद्धांत से भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन का विचारधारा और भारत में आंदोलन किया जो गांधी जी ने थोरों की पुस्तक पढ़कर ही सत्याग्रह शब्द को गढ़ा था।
गांधीजी के आंदोलन की नीतियां:-
महात्मा गांधी आंदोलन की तैयारियां से पहले पूरी तरह से संयम बरतकर आंदोलन की तैयारी करते थे जिसमें सत्य अहिंसा और सत्याग्रह की कल्पना उनकी पहले पृष्ठ पर होती थी। सत्याग्रह शब्द की विचारों को लेकर कई विचारों को त्याग किया जाता था निस्वार्थ तथा नैतिक तथा नैतिक आंदोलन के लिए अपील करते थे और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित होते थे। गांधीजी कभी भी अपने आंदोलनों में हिंसा का प्रयोग कतई बर्दाश्त नहीं था यदि आंदोलन हिंसा की संभावना या हो जाने की घटना हो जाती तो गांधीजी तुरंत आंदोलन को वापस ले लेते थे। जैसे कि भारत में सुप्रसिद्ध आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन
हिंद स्वराज में आंदोलन को जनमानस को गोलबंद किया गया है। नई राजनीतिक विचारधारा की पुस्तक है। 1915 में भारतीय आंदोलन की दिशा और दशा बदल दिया और खुद को एक मिसाल स्थान बनाया। गांधीजी की यह विचार पूरे भारतीय हृदय पूर्वक से स्वीकार किया। गांधीजी की राजनीतिक दर्शन में समस्त वर्गों की कल्याण निहित है तथा इनकी उधार का समावेश है जो खुद को एक आत्माबल की दिशा दी हैं। ग्रंथ में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की आजादी में या भारत को आजाद कराने में एक मिसाल विचारधारा बनती है । गांधीजी लाठी-डंडे के बल से ही अंग्रेजों को भारत से निकाल दिए और अंततः भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ।
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मुक्ति का मार्ग ज्ञान प्राप्त से ही हैं
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