" संविधान किसी भी देश की सर्वोच्च प्रशासन इकाई होती है जहां से देश नियंत्रित और संचालित की जाती है"।
भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू कर दिया गया भारतीय संविधान 1935 का अधिनियम बड़ी हिस्सा है । भारत में पहली संविधान बनाने की विचार और 1934 में एम ० एन रॉय ने महसूस किया था। 1935 में इंडियन नेशनल कांग्रेस संविधान की मांग की थी। 1938 में पंडित नेहरू द्वारा संविधान की मांग को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया था। भारतीय संविधान विश्व की सबसे बड़ी संविधान है । संविधान निर्माता अंबेडकर को संविधान का पिता कहा जाता है।
भारतीय संविधान को बनाने से पहले अंग्रेज सरकार द्वारा समय-समय पर कानून लाएंगे जो इस प्रकार है-
1. 1858 का अधिनियम:-
भारत की प्रशासकीय शक्ति ब्रिटिश सरकार को दिया गया और भारत के शासन विक्टोरिया के हाथों में कर दिया गया सबसे पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग को बनाया गया था 1858 का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक मशीनरी में सुधार था ताकि भारत की प्रशासन को सही तरीके से चलाया जा सके।
2. 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम:-
केंद्रीय और प्रांतीय परिषद में सदस्यों के आकार को बढ़ा दिया गया पहली बार अनुपूरक प्रश्न पूछने और बजट की संकल्पना प्रस्तुत किया गया वायसराय की परिषद में पहली बार सत्येंद्र प्रसाद सिंहा विधि वेता के रूप में चुना गया। इस अधिनियम में संप्रदायिक निर्वाचन पृथक मंडल की व्यवस्था किया गया जिसमें समुदाय के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को चुना जाने लगा इस प्रकार से भारत में एक प्रकार से सांप्रदायिक माहौल को उत्पन्न किया गया जो आज तक यह परंपरा बड़ हुई है।
3. 1919 का मोंटेग्यू- चेम्सफोर्ड अधिनियम:-
पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को पृथक किया गया विधान बनाने की शक्ति दिया गया। पहली बार "लोकसभा और राज्यसभा" की द्विसदनीय व्यवस्था को लागू किया गया इसी एक्ट के माध्यम से 1926 में सिविल सेवकों की भर्ती के लिए "केंद्रीय लोक सेवा आयोग" का गठन किया गया इसमें ईसाइयों अगले भारतीयों और गोपियों को शामिल कर दिया गया तथा संप्रदायिक पत के आधार पर चुनाव को भी और बढ़ा दिया गया।
3. साइमन आयोग 1927:-
साइमन कमीशन का गठन 1927 में ही किया गया था इसका अध्यक्षता सर जॉन सामान था इसमें कुल 7 ब्रिटिश अधिकारी थे आयोग ने संवैधानिक सुधारों पर एक "श्वेत पत्र" तैयार किया था जो 1935 के अधिनियम के रूप में शामिल किया गया आयोग को भारत में बहिष्कार किया गया क्योंकि इसमें एक भी भारतीय शामिल नहीं था। भारतीय संविधान को बहाना था लेकिन सभी सदस्य थे साइमन कमीशन का स्वागत भारत में बंद दुकानों, हड़ताल विरोध हो बंद पड़े तालों और जुलूस ने हीं किया।
5. संप्रदायिक अवार्ड इन की घोषणा:-
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम से मैकडोनाल्ड ने 1932 में अल्पसंख्यकों के लिए एक योजना लाई जिसे को कम्युनल अवार्ड या संप्रदायिक अवार्ड के नाम से जाना जाता है इस में दलितों के लिए भी निर्वाचन मंडल का विस्तार किया गया इसी वजह से गांधीजी ने आमरण अनशन का फैसला किया और सितंबर 1932 में ही गांधी और अंबेडकर के बीच "पूना पैक्ट" होता है जिसमें दलितों को विधान परिषद केंद्रीय परिस्थितियों में आरक्षण की व्यवस्था तथा भारत के संपूर्ण अधिकारीक पदों पर आरक्षण की व्यवस्था कर दिया गया जो आज भी लागू है।
6. 1935 का अधिनियम:-
यह अधिनियम भारतीय संविधान का प्रमुख हिस्सा है क्योंकि सबसे अधिक भाग भारतीय संविधान में 1935 हिस्सा को ही शामिल किया गया है। इस अधिनियम में 321 अनुच्छेद है 10 अनुसूचियां शामिल किया गया है इस अधिनियम से ही पहली बार भारत में 1937 में ब्रिटिश भारत के अधीन चुनाव हुआ तथा आरबीआई का गठन भी हुआ उच्चतम न्यायालय गठन हुआ केंद्रीय और प्रांतीय के साथ-साथ संयुक्त लोक सेवा आयोग का स्थापना 1935 अधिनियम के तहत ही किया गया।
7. क्रिप्स मिशन:-
यह मिशन 1942 में आया जिसका उद्देश्य भारतीय संविधान पर बात करना था भारतीय द्वारा एक संविधान सभा का गठन की जाएगी और संविधान बनाने का कार्य किया जाएगा। संविधान पसंद नहीं आएगा किसी भी भारतीय राजवाड़े को आजाद रहेगा अन्य अलग प्रकार की उसकी संबंध बीटीश सरकार से करेगी। मिशन में आईएनसी और मुस्लिम लीग ने स्वीकार नहीं किया और दोनों ही संविधान सभा गठन कार्य किए जाने का प्रावधान किया इस प्रकार से क्रिप्स मिशन मिशन का उद्देश्य कार्य नहीं हुआ और असफल रहा।
8. कैबिनेट मिशन:-
यह मिशन मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सुलह कराने की कोशिश किया इसमें तीन सदस्य लॉर्ड पैथिक लोरेंस, सर स्टेफरड क्रिप्स और ए बी एलेग्जेंडर था यह मिशन असफल रहा 16 मई 1948 को इंग्लैंड और भारत के लिए "यूनियन ऑफ इंडिया" की घोषणा किया गया जिसे ब्रिटिश मामले ,रक्षा ,संचार पर ब्रिटिश का अनुपात होगा बाकी पर भारतीयों का कार्य होगा।
स्वतंत्र भारत के अधीन संविधान का विकास
संविधान सभा का गठन:-
नवंबर 1946 को हुआ जिसमें 389 सदस्य थे जिसमें 296 सदस्य ब्रिटिश भारत और बाकी सीटें देसी रियासतों था। इस सभा महात्मा गांधी शामिल नहीं थे भारत में संविधान बनाने के लिए पहली
विधानसभा का कार्य:-
पहली बैठक 6 दिसंबर 46 को हुआ जिसकी अस्थाई अध्यक्षता सच्चिदानंद सिन्हा ने किया जो बाद में स्थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया। नेहरू 13 दिसंबर 1946 को संवैधानिक उद्देश्य प्रस्ताव को पारित किया वह 1947 को सर्वसम्मति से पारित कर लिया गया इसे स्वीकार कर लिया गया लघु संविधान कहां गया इसमें एकता अखंडता, गणराज आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक ,व्यवस्था किया गया
मई 1949 को राष्ट्रमंडल की सदस्यता का सत्यापन किया गया।1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपना 1950 को राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत को अपनाया गया प्रसाद को 24 जनवरी से 1950 को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति बनाया गया।
संविधान सभा के निर्माण समितियां:-
संविधान बनाने के लिए कुल 8 बड़े समितियां थी संघ समिति, समिति समिति, प्रांतीय संविधान समिति बड़ी-बड़ी समितियां थी जिसे सबसे बड़ी संख्या प्रारूप समिति की थी जिसकी अध्यक्षता डॉ आंबेडकर थे संविधान लिखने को सौंपी गई थी विधानसभा की विशेषता में 395 आर्टिकल 22 भाग और 8 अनुसूचियां शामिल थी वर्तमान में 465 भाग है और 12 अनुसूचियां और 25 भाग हैं इस प्रकार से एक लंबी दस्तावेज है
भारतीय संविधान एकात्मक की और दुकान चुका है जिसमें केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाया गया है । संविधान की एकता नागरिकता देश की अखंडता आपातकालीन संसदीय व्यवस्था केंद्र की ओर झुका हुआ है। भारत ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था को अपनाया है। देश की सर्वोच्च कार्यपालक देश के जनता द्वारा चुना जाता है। मौलिक अधिकार में अमेरिका से लिया गया है । समानता स्वतंत्रता शोषण संवैधानिक उपचारों का अधिकार एक प्रकार से भारतीय लोगों का अधिकार प्रदान करती है। भाग 4 में अनुच्छेद 51- का उल्लेख किया गया है जिसमें भारतीय नागरिकों को राष्ट्र ध्वज ,संप्रभुता ,अखंडता की रक्षा करना है समय आने पर देश की भी सुरक्षित बनाना है।
नागरिकता एक एकता को रखा गया है । आपातकालीन की शक्तियां राष्ट्र को निहित है और यह जर्मनी से लिया गया है ताकि राष्ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक ढांचे को सुरक्षा प्रदान किया जा सके
भारतीय संविधान का विकास 1858 अधिनियम 1935 का अधिनियम 1947 के भारतीय स्वाधीनता अधिनियम संविधान सभा गठन का कार्य की एक रूपरेखा तय किया साथ ही साथ सबसे लंबी दस्तावेज में शामिल किया गया उनकी लंबी प्रक्रिया के रूप में गुजरी जिसमें 2 साल 11 महीने 18दिन का समय लगा। भारतीय संविधान में स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व, मौलिक अधिकार ,समानता ,गणराज्य, गरिमा इत्यादि की कवच प्रदान किया गया है इसे कोई व्यक्ति भारतीयों लोगों अधिकारों को छेड़छाड़ नहीं कर सकती है सरकार भी परिहार या समाप्त नहीं कर सकती है ।
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