खुद से आशावान होना:-
जीवन का रीत है असफलता का होना यदि हम इसे कमजोरी समझते हैं तो आपके लिए या बेहद खतरनाक साबित होगा क्योंकि सफलता पाने के लिए असफल होना आवश्यक होती है और यही असफलता हमें "सबक और विश्लेषण" कराती है कि हमारी सफलता में कौन सी कमियां रह गई और यही विचार दोबारा हमें ऊर्जावान और सूझबूझ के साथ आगे बढ़ाने को प्रेरित करती है। जीवन में खुद से प्रेरित होना एक बहुत बड़ी पडाव होती है क्योंकि व्यक्ति अपने रास्ते में आने वाले समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं और वहां अपने आप का आपा खो बैठते हैं और कभी कबर उसे दूसरों की की ऊर्जावान शब्द भी प्रेरित नहीं कर पाता है इसलिए सबसे बड़ी बात यह है कि व्यक्ति खुद से खुद से प्रेरित हों ताकि वह सही दिशा में काम करें और ऊर्जावान बनी रहे दूसरे के बातों को सुनकर हम कितना दिन तक ऊर्जावान रह सकते हैं यदि संभव हो सके तो अच्छे साहित्य को पढ़कर आप आपने लिए प्रतिदिन ऊर्जावान रह सकते हैं।
स्वयं पर अधिक विश्वास करना:-
अपने जीवन में कर्म का लक्ष्य बनाकर उसे आगे बढ़ने चाहिए और जितना हो सके उसे सुसंगत रुप से सजाने चाहिए और आगे बढ़ने चाहिए बेझिझक निडर होकर अपने लक्ष्य की और आगे बढ़े यदि आप के मार्ग में आने वाली बाधाओं का सामना नहीं कर पा रहे हैं तो आप तुरंत ही बौद्धिक पूर्ण व्यक्ति से बेझिझक सलाह ले सकते हैं और अपने अनुसार से उसे सही दिशा में डालकर आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि खुद पर विश्वास और आपने मार्ग ही तुझे सफलता की ओर ले जाएगी लेकिन जीवन के विकास में और लक्ष्य को पाने के लिए कर्मशील होना आवश्यक हो जाती है जिस प्रकार से "बाबर ने अपने बेटे हुमायूं से कहा इस दुनिया को अपने मुट्ठी में करना है तो कर्मशील बनो कर्मशील से ही तुम दुनिया पर राज कर सकते हो कर्म नहीं करोगे तो तुम्हारा अस्तित्व ही नहीं बचेगा । कर्म तुम्हारा प्रथम मार्ग होता है और धर्म तुम्हारा दूसरा स्तर होता है।
सामाजिक परिवेश का पड़ाव :-
मानव एक सामाजिक प्राणी है वह सामाजिक परिवेश में रहता है। अपने जीवन में आगे बढ़ना शुरू करते है तो सामाजिक रूप से आप ईष्र्या का शिकार बन सकते हैं लेकिन सदियों की परंपरा है सामाजिक रूप से व्यक्ति का बहिष्कार और उसी व्यक्ति को स्वीकार सामाजिक रूप से किया गया है इन सब चीजों को आप दरकिनार करके अपने लक्ष्य की और आगे बढ़े यदि आपके पास आत्मविश्वास और आत्मसंयम है तो आपको अपनी मार्ग से को डिगा नहीं सकता चाहे वह सामाजिक रूप से हो चाहे वह राजनीतिक रूप से हैं अन्य कारणों क्यों ना हो। जीवन में मनुष्य अकेला नहीं रह सकता है वह किसी न किसी मनुष्य के संपर्क में जरूर आता है ऐसी सिचुएशन में जो व्यक्ति के साथ बात करनी चाहिए और उनकी अच्छाइयों को अपने अंदर समाहित करनी चाहिए ताकि उसे यह भी ना लगे कि वह मेरा बहिष्कार कर रहा है मुझसे ईर्ष्या की भावना जगा रहा है क्योंकि कभी-कभी सामाजिक रूप से अभी हम भय हो जाते हैं तो आपका आत्मविश्वास कमजोर हो जाते हैं यदि आपके मन में भय आ रहा है तो इसे आप निकाल दें क्योंकि भय की भावना में आप अपनी सफलता की ओर नहीं बढ़ पाएंगे।
लक्ष्य और महत्वकांक्षा को समझना:-
व्यक्ति को अपने जीवन में लक्ष्य का निर्धारण करना चाहिए क्योंकि एक लक्ष्य पर अभी आप चलेंगे तो आपको सफलता मिलेगी जिस प्रकार से महाभारत में अर्जुन ने सिर्फ मछली के आंख पर ही तीर मारा इसे स्पष्ट है क्यों उनकी बौद्धिक एकाग्रता उनकी मंकी संतुलन और आत्मविश्वास बहुत ही अधिक था जिसके चलते वह बिना देखे मछली की आंख में तीर मारता है इसी प्रकार से अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपकी नेक इरादे ,धैर्य ,इंसानियत, पारदर्शी है तो आपको सफलता से कोई नहीं रोक सकता है। जबकि वही महत्वाकांक्षा आपके लिए घातक साबित हो सकता है महत्वकांक्षी में आप अनेक रास्तों पर चलना चाहते हैं और दुनिया के अनेक शक्तियों को अपने अधीन करना चाहते हैं जिस प्रकार से हिटलर एक तानाशाही था लेकिन उनका जीवन में लक्ष्य नहीं बल्कि महत्वकांक्षी था उनकी महत्वाकांक्षा याद थी कि दुनिया पर मैं राज करो मेरी हुक्म चले लेकिन सत्य है कि उनका पतन हो गया क्योंकि एक समय पर आने को राहों पर कदम रखना आपके लिए घातक साबित हो सकता है इसके अलावा इतिहास में कई और महान लोग हैं जो अनेक रास्तों से गलत नीतियां अपनाने ,लूट खसोट, भ्रष्टाचार में लिप्त, अधिक कमाने की चाह में अपने आप को भूल कर अलग रास्ता अपना लेते हैं ऐसे लोगों का पतन स्वत: और नामोनिशान मिट जाता है जिस प्रकार से आप जान सकते हैं भारतीय शेयर बाजार के अरशद मेहता की कहानी उसने किस प्रकार से भारतीय शेयर बाजार को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया लेकिन सत्य है कि उनकी कमाई ₹1 भी नहीं रही और उनका जीवन जेल में ही बीता। पारदर्शी, ईमानदारी ,बौद्धिक पूर्ण, कूटनीतिक तरीके से आगे बढ़ने चाहिए आपकी सफलता मिलने से दूसरों को तकलीफ या दूसरों को पीड़ा नहीं होनी चाहिए और यहां तक समाज, गांव ,शहर ,जिले राज्य और राष्ट्र को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए सदा उन्नति अपने समाज और राष्ट्र की होनी चाहिए।
सफलता लेती है समय:-
व्यक्ति को सफलता पाने के लिए लंबे समय का सामना करना पड़ता है क्योंकि सफलता समय मांगती है समय के साथ साथ हम अपने जीवन में अनेक अनुभव कोशिक करते चले जाते हैं कई ऐसे मुद्दों से टकराव होते चले जाते हैं और उसे सही ,गलत क्या है उसे हम अपने जीवन में आपनाते चले जाते हैं उसे सामाजिक रूप में उसे किस प्रकार से लागू करना है और किस प्रकार से मांग है वह हम समझ जाते हैं जिसके चलते सफलता पाना आसान हो जाती है। कुछ ऐसी चीजें होती है जिनके पास बुद्धि प्रबल माहौल में जाने से वह बहुत जल्दी ही अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है जिस प्रकार से राजा अकबर ने मात्र 13 साल की उम्र में राजा बना उन्हें साथ एक अच्छे शासक के रूप में गिना गया क्योंकि अकबर का परिवेश एक बड़े बौद्धिक टीमों द्वारा संचालित होती थी और अकबर हमेशा जिज्ञासु था बौद्धिक पूर्ण था पारदर्शी और ईमानदारी से कार्य का निर्वहन करता था इसी प्रकार से जीवन में यदि व्यक्ति को सही समय पर सही परिवेश, माहौल और सलाह मिल जाती है तो वह अपने जीवन बहुत जल्द ही सफलता हासिल कर लेती है। पर उत्तम पुरुष बनने के लिए उसे कई समय लग जाती है और सामाजिक रूप से एक अच्छे छवि बनाने भी उसे अच्छा समय लग जाता है इसलिए जीवन में संयम आत्मविश्वास ही आपका एक बड़ी पूंजी है।
इस आलेख में व्यक्ति किस सामाजिक सोच, सकारात्मक सोच सयंमधारी ,पारदर्शी, ईमानदारी के साथ एक लक्ष्य कर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेता है। व्यक्ति अपने जीवन में एक लक्ष्य को आगे बढ़ाता है तो उसे बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्ति होती है आत्मविश्वास उसके अंदर समाहित है और वह बिना मोह ,माया है और बिना गुलामी के साथ काम कर रहे हैं तो उसे एक बड़ी सफलता हाथ लगेगी और जीवन में अपने से आत्मविश्वास से प्र है और समय पड़ने पर बेझिझक दूसरे व्यक्ति से सलाह लेता है तो ऐसे व्यक्ति भी अपने जीवन में कभी भी पीछे नहीं रहता है और एक परम व्यक्ति बन जाता है ।
जय हिंद
Kindly share it
Thankyou
nice article
जवाब देंहटाएंThankyou
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